फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

समाज में परिवर्तन के साथ ही पत्रकारिता जगत में भी आया बदलाव

विज्ञापन
अमर उजाला के तरफ से संत विनोबा पीजी कॉलेज में आयोजित स्व मुरारीलाल माहेश्वरी स्मृति में राष्ट्र? - फोटो : DEORIA
विज्ञापन
वाद-विवाद में प्रतिभागियों ने रखे ओजस्वी विचार
विज्ञापन

स्व. मुरारीलाल माहेश्वरी स्मृति वाद-विवाद में संत विनोबा के शुभम विजेता
संत विनोबा पीजी कॉलेज सभागार में हुई प्रतियोगिता में जिले भर के कॉलेजों ने किया प्रतिभाग
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। ‘अमर उजाला फाउंडेशन’ की ओर से शनिवार को संत विनोबा पीजी कॉलेज में आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने ओजस्वी विचार रखे। ‘मीडिया निष्पक्ष होने की बजाए राजनीति से प्रेरित है’ विषय पर प्रभावी तर्कों और विचारों के माध्यम से अपने पक्ष को मजबूती से रखा। जिले के प्रमुख कॉलेजों के बीच हुई इस जिलास्तरीय प्रतियोगिता में भाषा, शैली, आत्मविश्वास सहित विभिन्न मानकों पर परखने के बाद संत विनोबा कॉलेज के शुभम त्रिपाठी केे विजेता चुना गया।
मुख्य अतिथि विश्व भोजपुरी सम्मेलन के अंतर्राष्ट्रीय महासचिव व वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अरुणेश नीरन ने कहा कि स्वाधीनता के समय अधिकांश अखबार पूंजीपतियों के हाथ में नहीं थे। कुछ अंग्रेजी के अखबार थे भी तो उनमें जन सरोकारों से कोई लेना देना नहीं था। आजादी से पूर्व लोग अपना सब कुछ न्योछावर कर पत्रकारिता के लिए तत्पर रहते थे। समाज में परिवर्तन के साथ ही मीडिया में भी परिवर्तन आया है। 70 के बाद तो इसमें और गिरावट आई। बाजार ने शब्द जगत के ऊपर अपना एकाधिकार कर लिया। इससे क्रमश: इसका पतन हो रहा है। उदाहरणों के जरिए बताया कि मिशन के प्रति जब तक फिर दीवानगी नहीं होगी, हमारा ध्यान में तर्कशक्ति, भाषा के प्रति संवेदना, निर्भयता नहीं आएगी तब तक इस विषय पर बहस जारी रहेगी। उन्होंने छात्र-छात्राओं में विचार और तर्कशक्ति बढ़ाने के लिए ऐसे आयोजनों की जरूरत बताई। प्रतिभागियों ने ‘अमर उजाला’ के प्रयासों को सराहा। कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. असीम सत्यदेव, डॉ. नाजिश बानो, डॉ. एके सिंह ने भी विचार रखे। अधिवक्ता उद्भव मिश्र, साहित्यकार सरोज पांडेय, वरिष्ठ पत्रकार संदीप त्रिपाठी ने निर्णायक दल की भूमिका बनाई।
विज्ञापन

इन्होंने किया प्रतिभाग
प्रतियोगिता में विषय के पक्ष में स्मृति शाही, उत्कर्ष रावत, काजल मिश्र, छोटी सिंह, बबीता कुशवाहा, पूजा कुशवाहा, देवानंद उपाध्याय, सुशांतिका मिश्र, अन्नपूर्णा शुक्ल, अन्नया तिवारी व अभिषेक यादव ने विचार रखे। वहीं, कृष्णानंद पांडेय, शबाना खातून, देवानंद उपाध्याय, मनीषा गोड़, अजीत कुमार, तृप्ति तिवारी, शुभम त्रिपाठी, निधि राय व रूपम दुबे ने अपने तर्कों से मीडिया को निष्पक्ष बताया। प्रतियोगिता में संत विनोबा पीजी कॉलेज, बीआरडी पीजी कॉलेज, पं. दीनानाथ पांडेय राजकीय महिला पीजी कॉलेज, रामजी सहाय पीजी कॉलेज रुद्रपुर, स्व.रविंद्र किशोर शाही राजकीय महाविद्यालय पथरदेवा, सिद्घेश्वर शीतलदेव नारायण महाविद्यालय भरहेचौरा भटनी, मांती देवी विश्वनाथ महिला महाविद्यालय देवपार मदनपुर, जुगल किशोर खेतान ब्रह्मदेव तिवारी महाविद्यालय पकड़ी वीरभद्र देसही देवरिया, रैनाथ ब्रह्मदेव पीजी कॉलेज सलेमपुर, बहादुर यादव पीजी कॉलेज भटनी कॉलेज के बच्चों ने प्रतिभाग किया।
शुभम बने विजेता, पुरस्कार में मिले पांच हजार नकद
वाद-विवाद प्रतियोगिता के बाद निर्णायक मंडल के उद्भव मिश्र, सरोज पांडेय व संदीप त्रिपाठी ने प्रतिभागियों की विषय पर पकड़, बोलने के अंदाज, प्रस्तुति की शैली की जांच के बाद विजेताओं के नामों की घोषणा की। इसमें एसवीपीजी कॉलेज के विधि विभाग पांचवें सेमेस्टर के शुभम त्रिपाठी सर्वाधिक 22 अंक प्राप्त कर विजेता बने। उन्हें पांच हजार रुपये नकद का इनाम दिया गया। संयुक्त रुप से दूसरे स्थान पर रहीं बीआरडी पीजी की अनन्या त्रिपाठी, संत विनोबा की ही काजल मिश्रा और विधि विभाग की स्मृति शाही को एक-एक हजार का पुरस्कार मिला। तीसरे स्थान पर रामजी सहाय पीजी कॉलेज रुद्रपुर के उत्कर्ष रावत रहे, जबकि वहीं की शबाना खातून, रैनाथ ब्रह्मदेव पीजी कॉलेज सलेमपुर की तृप्ति तिवारी व बहादुर यादव पीजी कॉलेज के अभिषेक यादव को सांत्वना पुरस्कार दिया गया।
ऐसे अवसर कॅरियर को बेहतर बनाने में मौके प्रदान करते हैं। इस तरह के मंच और आयोजित होने चाहिए, ताकि छात्र-छात्राओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिल सके। - अभिषेक यादव
पहली बार बड़े मंच पर अपनी बात कहने का मौका मिला। यह शानदार अवसर रहा मेरे लिए। भले की विजेता नहीं बन पाई, लेकिन इससे अपने विचार रखने का आत्मविश्वास मिला। - पूजा कुशवाहा
ऐसे आयोजन हर स्कूल कॉलेजों में होने चाहिए, ताकि हर छात्र को अपने विचार व्यक्त करने का मौका मिल सके। यहां मिले अनुभव से आगे और बेहतर करने का प्रयास करेंगे। - सुशांतिका मिश्रा
विज्ञापन

सबसे पहले अमर उजाला ने छात्रों को यह बेहतर मंच प्रदान किया, उसके लिए धन्यवाद। अपनी बात कहने के ऐसे अवसर अब कम होते जा रहे हैं। छात्रों के व्यक्तित्व विकास को यह होते रहना चाहिए। - अनन्या तिवारी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें