संवाद न्यूज एजेंसी।
रुद्रपुर,एकौना। बाढ़ का अभिशाप झेल रहे कछार और दोआबा के 116 गांव के लोगों में हर साल बाढ़ का भय बना रहता है। राप्ती और गोर्रा का जलस्तर बढ़ने के साथ ही बंधों की हालत देख ग्रामीणों को बर्बाद होने की आशंका प्रबल हो जाती। तीन प्रलयंकारी बाढ़ झेल चुके कछार क्षेत्र के 64 गांव के लोगों को पिड़रा-भुसवल से लेकर पिड़रा-करनपुर और जोगिया-सरमोहना बांध के कटने से खतरा बना रहता है।
वर्ष 1998 में पिड़रा-करनपुर बांध कटने से गोर्रा का पानी रुद्रपुर कस्बे में घुस गया था। इस बार एक साल से बंधे पर हो रहे निरोधात्मक कार्य की गति को देख तटवर्ती गांव के लोगों में नाराजगी बनी है। गोर्रा नदी के किनारे बना पिड़रा-करनपुर बांध सिलहटा, करौता, जगत माझा और करनपुरा गांव के पास हर साल कटान हो रहा है।
बांध को बचाने के लिए सिलहटा गांव के सामने पायलट प्राेजेक्ट से करीब तीन करोड़ रुपये से कटानरोधी काम हुआ है। इसके बाद नदी करौता और करनपुरा से आगे पांडेय माझा गांव के पास यू टर्न कर कटान करने लगी। करीब सौ मीटर कटान कर नदी बंधे से स कर बहने लगी। इसे देख बाढ़ कार्य खंड की ओर से तीन जगहों पर सात करोड़ रुपये से बोरी में मिट्टी डालकर पिचिंग किया जा रहा है।
बंधे के तटवर्ती गांव के पिंडरा निवासी संजय सिंह, मुन्ना सिंह, अंबिका सिंह, रतन शुक्ला, विनोद मिश्रा आदि ने कहा कि पिछले दो साल से बरसात में बंधे पर काम में तेजी दिखाई देती है, मगर नदी के कटान का दायरा हर साल बढ़ता जा रहा है। अब नदी बंधे से सटकर बहने लगी है।
मानसून के पहले निरोधात्मक कार्य पूरा नहीं हुए तो कई जगह बंधे कट जाएंगे। बांध कटने से भारी तबाही मच चुकी है। इस बावत सिंचाई विभाग के एई नरेंद्र जाड़िया ने कहा कि बंधों पर निरोधात्मक कार्य चल रहा है। बरसात से पहले काम पूरा करा दिया जाएगा।