पुलिस ने कोइलगढ़हा गांव में शुक्रवार को छापा मारा। भट्ठियां तोड़ीं। लहन नष्ट किया। कच्ची शराब भी जब्त की। यह कार्रवाई भी पहले पड़े छापों का सिक्वल भर ही रह न जाए, यही आशंका गांववालों, खास तौर से महिलाओं को है। क्योंकि अब तक की धरपकड़ और छापेमारी नुमाइशी ही साबित हुई है। वरना कच्ची का काला धंधा न तो 50 साल की उम्र पाता और न ही घर-घर पनपता। असली दर्द तो उन महिलाओं की आंखों में है जिनके सुहाग और सुख-शांति को अवैध शराब का यही दानव निगल गया। करीब आठ हजार आबादी वाले इस गांव में 42 परिवार कच्ची के धंधे में लिप्त बताए जाते हैं जिनमें 12-14 महिलाएं भी हैं। भले इस काले धंधे से इन घरों में चूल्हा जल रहा हो लेकिन हर साल 10-12 मौतें जरूर ऐसी होती हैं जिनका प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष कारण यही कच्ची होती है। इस तरह बर्बाद परिवारों की संख्या सैकड़ों में है।
कच्ची ने कहीं का नहीं छोड़ा
कच्ची शराब ने दर्जनों महिलाओं की मांग तो सूनी की ही, मृतकों के बच्चों का भविष्य भी बिगड़ा। आजिज महिलाओं ने यह अवैध धंधा बंद कराने को कई बार आंदोलन भी किए। तेतरी देवी बताती हैं कि शाम को घर नर्क बन जाता है। पुरुष शराब के नशे में महिलाओं को पीटते हैं। फूलपती देवी पति के शराब पीने की आदत से आजिज हैं। बताया कि पति की लत से पांच बच्चों की परवरिश मुश्किल है। संगीता तो चार बच्चों का पालन अपने बूते कर रही हैं। बोलीं, अधिकांश पुरुष कच्ची के आदी हैं। माया देवी ने कहा कि शाम ढलते ही पूरा गांव नशे में झूमने लगता है। सड़क पर चलने में डर लगता है।
सिर्फ चार माह लगी लगाम
लोग बताते हैं कि बीते दशकों में तत्कालीन एसपी प्रभाकर चौधरी के कार्यकाल में चार माह के लिए जरूर कच्ची की भट्ठियां बुझी रहीं पर उनके तबादले के बाद फिर से धधकने लगीं। कोइलगढ़हा का बिचला टोला और सुकईपुरा कच्ची का गढ़ हैं। दोनों टोले कुर्ना नदी के किनारे बसे हैं। भौगोलिक स्थिति भी धंधेबाजों के लिए मुफीद हैं। घर-घर शराब बनाई और बेची जा रही है।
पुलिस ही है सरपरस्त
गांव के प्रधान सरोज कुमार यादव ने कहा कि पुलिस ठान ले तो यह धंधा बंद हो जाएगा। आंदोलनों के बाद भी पुलिस सोई रही। पुलिस तो धंधेबाजों की सरपरस्त लगती है। हर साल कच्ची पीने से 10 से 12 लोगों की मौत हो रही है।
कोइलगढ़हा में कच्ची पर पूरी तरह रोक लगेगी। यह धंधा चला तो हल्का के सिपाहियों पर कार्रवाई तय है। कोतवाली पुलिस को लगाम लगाने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।-ब्रजेंद्र राय, सीओ