फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फायरसर्विस के इंतजाम साबित हुए नाकाफी

विज्ञापन
विज्ञापन
दो जिलों से नहीं मिलती मदद तो बिगड़ते हालात
विज्ञापन


हादसे ने खोली जिले में आग से बचाव के इंतजामों की पोल
काफी देर तक पंपसेट और हैंडपंपों के जरिए आग बुझाने में लगे रहे लोग
बैतालपुर में ऑयल डिपो होने के बाद भी अग्निशमन की नहीं खास तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। तीन कंपनियों का तेल डिपो होने के कारण जिला आग की आपदा को लेकर बेहद संवेदनशील जोन में है। पूर्व में हुई घटनाएं इसके प्रति सचेत भी कर चुकी हैं। बावजूद पुरवा की अटैची फैक्ट्री में हुए हादसे ने अग्निशमन के इंतजामों की पोल खोल दी है। आलम यह रहा कि भीषण लपटों में घिरी फैक्ट्री की आग बुझाने के लिए लोग काफी देर तक पंपसेट, मोटर व अन्य निजी जलस्रोतों के माध्यम से जूझते रहे। सूचना के पौन घंटे बाद फायर ब्रिगेड का पहला वाहन मौके पर पहुंचा भी तो उसमें पर्याप्त पानी ही नहीं था। नतीजा दस मिनट में ही टैंक खाली होने से वाहन को लौटना पड़ा। इसके बाद से अगला टैंकर करीब एक घंटे बाद पहुंचा। तब तक लपटों पर काबू पाने के लिए पंपसेट, मोटर ही सहारा थे। आग से बचावों के इन इंतजामों पर लोगों में गुस्सा साफ दिखा।
जिले में आग की पहली घटना 30 जून 2004 की है। बैतालपुर स्थित इंडियन ऑयल डिपो में भीषण आग को बुझाने में नाकों चने चबाने पड़े थे। आग को बुझाने में हेलीकॉप्टर की मदद लेनी पड़ी थी। आठ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बुझाई जा सकी इस आग में जलने से एक डिपो कर्मी की मौत हो गई थी। इस हादसे के बाद दूसरी घटना पुरवा के औद्योगिक क्षेत्र में करीब छह वर्ष पहले हुई थी। जय सिंह के पेपर मिल में भीषण आग से काफी नुकसान हुआ था। दो साल पहले कोऑपरेटिव चौराहे पर मोबिल की दुकान में आग लगी थी। करीब एक साल पहले न्यू कॉलोनी में इलेक्ट्रिक सामानों की दुकान में भी आग लगी थी। इसमें करीब एक करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ था। आग बुझाने के लिए गोरखपुर के फायर ब्रिगेड की मदद लेनी पड़ी थी। बार-बार हो रहे हादसों के बाद भी जिम्मेदार अग्निशमन के बेहतर इंतजामों पर गंभीर नहीं दिखे। लापरवाही का ही असर रहा कि जब अटैची फैक्ट्री में आग लगी तो आग बुझाने में जिले के अग्निशमन विभाग के संसाधन कम पड़ गए। शुरुआती डेढ़ घंटे तक लोग सिर्फ पंपसेट, मोटर पंप जैसे अपने साधनों से आग बुझाने की कोशिशों में जुटे रहे। बाद में गोरखपुर, कुशीनगर के अग्निशमन वाहन पहुंचने पर राहत मिली।
विज्ञापन


डीएम ने दिखाई तत्परता
जिले में फायर सर्विस के संसाधन नाकाफी होते देख डीएम अमित किशोर ने तत्परता दिखाते हुए गोरखपुर और कुशीनगर से फायर सर्विस की गाड़ियां मंगाई। जिले के फायरसर्विस की गाड़ी का हाल यह था कि फैक्ट्री गेट पर बोरिंग से पानी भरने के लिए उसके पास फटी हुई पाइप थी। किसी तरह जुगाड़ से पानी भरा गया। संयोग ही था कि आग उत्तर की तरफ स्थित विद्युत उपकेंद्र, पूरब और पश्चिम की तरफ आवासों तक नहीं पहुंचा।

दामोदार सिंह की जमीन में है फैक्ट्री
जिले के प्रतापपुर के रहने वाले दामोदर सिंह ने पुरवा इंडस्ट्रियल एरिया में लगभग 12 हजार वर्ग फीट से अधिक जमीन खरीदा है। उन्होंने बताया कि पहले यहां फैक्ट्री खुद चलाते थे। बाद में वह लखनऊ में शिफ्ट हो गए। वर्ष 2012 में उन्होंने मनीष रूंगटा से फैक्ट्री को लीज पर दे दिया है। उन्होंने मकान का 75 लाख रुपये का बीमा कराया है। आग लगने की जानकारी उनको मिल गई है।

आग लगने पर लोगों ने सामान निकाला
मनीष की बंद अटैची फैक्ट्री में पिछले हिस्से से आग लगी थी। जानकारी होने पर वहां रह रहे कर्मचारी गिरिजाशंकर यादव, अनिल दुबे, केदार मद्धेशिया ने कुछ अन्य लोगों के सहयोग से फैक्ट्री में रखा कुछ सामान निकाला, लेकिन कुछ देर में ही आग ने विकराल रूप धारण कर लिया था। सामान निकालने के चक्कर में एक-दो लोग मामूली रूप से झुलस भी गए थे।

मौके पर जमे रहे सीओ, कोतवाल
देवरिया। सीओ सिटी वरूण मिश्र और सदर कोतवाल विजय नारायण प्रसाद मौके पर जमे रहे। दोनों अधिकारी भीड़ को इधर-उधर करने में लगे रहे। आग बुझाने में दोनों ने सहयोग किया। देर शाम तक दोनों मौके पर ही थे।
विज्ञापन



1.60 करोड़ का लोन, एक करोड़ का बीमा
मनीष रूंगटा ने बताया कि उन्होंने 1.60 करोड़ रुपये लोन लेकर मशीन खरीदी है। वहीं, उसने इस फैक्ट्री पर एक करोड़ रुपये का बीमा कराया है। आंख के सामने फैक्ट्री चलता देखकर मनीष ने कहा कि सब कुछ बर्बाद हो गया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें