खोराराम गांव में नौ लोगो की मौत के बाद पसरा सन्नाटा।
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देवरिया। सड़क हादसे में नौ लोगों की मौतों के बाद खोराराम गांव में दूसरे दिन भी मातम छाया रहा। गांव के अधिकांश घरों के चूल्हे नहीं जले। लोग उस मंजर को नहीं भूल पा रहे, जब उनके प्रियजनों की लाश आंखों के सामने थी और वे बेबस बने हुए थे। गांव की महिलाएं पीड़ित परिवारों के घर पहुंच ढांढस बंधाने में जुटी थीं तो पुरुषों की जुबां पर हादसे का जिक्र था। हर कोई नियति की क्रूरता को कोस रहा था।
देवरिया-रुद्रपुर मार्ग पर लक्ष्मीनारायण मंदिर के पास मंगलवार की रात बोलेरो दुर्घटनाग्रस्त होने से बरात में गए खोराराम गांव के आठ समेत नौ लोगों की मौत हो गई थी। इसकी खबर पहुंचने के बाद से ही पूरा गांव सदमे में है। बुधवार की शाम पोस्टमार्टम के बाद शव गांव पहुंचे। कुछ देर रोकने के बाद सभी शवों को एक साथ बरहज में सरयू तट पर ले जाकर दाह संस्कार कर दिया गया। दूसरे दिन गुरुवार को भी ग्रामीण सदमे से बाहर नहीं आ पाए थे। रह-रहकर उनकी आंखों के सामने बरात से लेकर घटनास्थल और पोस्टमार्टम हाउस तक का मंजर नाच रहा था। हादसे में किसी ने पिता, पति और बेटा खो दिया है तो किसी का दोस्त बिछड़ गया।
दयविदारक घटना से मर्माहत ग्रामीण एक-दूसरे को साहस बंधाने में खुद को असहज महसूस कर रहे थे। आलम यह रहा कि पूरे गांव में मातमी सन्नाटा रहा। हादसे के शिकार अमेरिका, शिवपूजन और दलसिंगार के घर आसपास ही हैं। यहीं से चंद कदम की दूरी पर महेंद्र वर्मा का भी मकान है, जिसके बेटे अनिल की शादी थी। मोहल्ले में सिर्फ सिसकियां ही सुनाई दे रही थीं। सत्यनारायण उर्फ सत्तन और बहादुर भी एक-दूसरे के पड़ोसी थे। दोनों घरों में कुल तीन मौतों से मोहल्ले के लोग बेसुध हैं। उधर, गोरखपुर मेडिकल कॉलेज से छुट्टी मिलने पर घर आए दीपनारायण के घर कुशलक्षेम जानने के लिए लोगों की आवाजाही जारी रही। लोग घटना का कारण जानने के लिए भी बेकल दिखे।
तेज धमाका हुआ और फिर छा गया अंधेरा
पैकौली। लक्ष्मीनारायण मंदिर के पास हादसे में घायल दीपनारायण चौहान गुरुवार को मेडिकल कॉलेज से डिस्चार्ज होकर घर आ गए। हादसे में उनके सिर, सीने में चोट लगी है। दाहिने हाथ में भी सूजन है। दीपनारायण ने घटना का हाल बताया तो उसे सुनकर ही लोग सहम गए। बकौल दीपनारायण, हादसे का कारण तेज रफ्तार तो थी ही आगे बैठे लोगों ने भी चूक की। बार-बार उनके नींद में जाने से चालक को भी झपकी आ गई। दीपनारायण ने बताया कि जयमाल के बाद रात 11 बजे तक सभी खाना खा चुके थे। चालक झुनझुन के कहने पर हम लोग इस उम्मीद में वाहन में सवार हो गए कि रात में घर पहुंच जाएंगे तो दिनचर्या समय से शुरू हो जाएगी। पशुओं को चारा-पानी देने, खेती सहित सुबह के अन्य कार्य प्रभावित नहीं होंगे। साढ़े 11 बजे सभी बोलेरो में सवार होकर घर के लिए निकले। वह और रामखेलावन चालक के साथ आगे की सीट पर थे। सोहनपुर से निकलते ही चालक ने गति तेज कर दी। वह 80 किलोमीटर प्रतिघंटा से ऊपर वाहन चला रहा था। कुछ ही देर में पीछे बैठे सभी लोग नींद के आगोश में समा गए। चालक के ठीक बगल में बैठे रामखेलावन भी सो गए। तेज रफ्तार चल रहे वाहन में कई बार ऐसा लगा कि अब हादसा हो जाएगा, लेकिन देवरिया तक सब कुछ ठीक रहा। रुद्रपुर मोड़ से वाहन आगे बढ़ा तभी उन्हें भी झपकी आ गई। कुछ पलों बाद ही तेज धमाका हुआ और वह दरवाजे से बाहर निकलकर दूर जा गिरे। आंखों के सामने अचानक अंधेरा छा गया। कुछ देर बाद आंख खुली तो पुलिस के लोग उन्हें टेंपो में ले जा रहे थे। रामखेलावन को पकड़कर वह टेंपो में सवार हुए। इसके बाद अस्पताल में ही उनकी आंख खुली। दीपनारायण के मुताबिक रात में चलना हमारी भूल थी। चालक ने भी जल्दी घर पहुंचने की कोशिश में गति पर नियंत्रण नहीं रखा। रही-सही कसर नींद के आगोश ने पूरी कर दी।