देवरिया। शहर से लेकर गांव तक कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है। इसके नियंत्रण के कोई उपाय नहीं होने से आम लोगों का जीना मुहाल हो गया है। वहीं कुत्तों के जन्मदर पर नियंत्रण के लिए शहर में बनने वाला एबीसी सेंटर फाइलों में बंद है।
जिले में हर महीने औसतन डेढ़ सौ लोग कुत्तों के शिकार होकर अस्पताल पहुंचते हैं। इसमें मेडिकल कॉलेज में 30-35 मरीज रोज आते हैं। इसमें 80 प्रतिशत से अधिक पीड़ित गली के कुत्ता काटने से पीड़ित रहते हैं।
गली-गली बच्चों और वयस्कों को कुत्ते के काटने की मामले सामने आ रहे हैं। इसके बाद भी आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के कोई उपाय नहीं किए जा रहे हैं।
जिले में मेडिकल काॅलेज के अलावा 38 स्वास्थ्य केंद्रों पर भी एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने की व्यवस्था है। इन केंद्रों पर भी लोग इंजेक्शन लगवाने आते हैं।
करीब एक वर्ष पहले नगरपालिका परिषद ने कुत्तों के बधियाकरण के लिए एबीसी सेंटर जटमलपुर में खोलने का प्रस्ताव तैयार किया था, पर ठोस परिणाम सामने नहीं आया है।
इससे कुत्तों के जन्मदर पर नियंत्रण की बात धरी की धरी रह गई। आए दिन कुत्ते हिंसक होकर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। रात में गलियों से अकेला निकलना मुश्किल हो गया है।
अधिशासी अधिकारी संजय कुमार तिवारी ने बताया कि नगर क्षेत्र में एबीसी सेंटर खोलने की प्रक्रिया जारी है।