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Deoria News: दो साल से जांच के झमेले में फंसा 30 सड़कों का निर्माण

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-अफसरों के पत्राचार के बाद पांच सड़कों की आई रिपोर्ट, तो शुरू हुआ काम
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-एफडीआर तकनीक से होगा सड़क का निर्माण, जांच के लिए लैब में भेजे गए है नमूने
-प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत होना है निर्माण
देवरिया। मंजूरी मिलने के दो साल बाद भी प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत बनाई जाने वाली जिले की 30 सड़कों का निर्माण शुरू नहीं हो सका है। इसकी वजह जांच के लिए लैब में भेजे गए नमूनों की रिपोर्ट आने में देरी बताई जा रही है। बिना रिपोर्ट आए एफडीआर तकनीक से बनने वाली इन सड़कों का निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया जा सकता है। निर्माण नहीं होने से खराब सड़कें 15 लाख से अधिक आबादी को दर्द दे रही हैं।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत करीब दो साल पहले ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की 35 सड़कों के निर्माण की मंजूरी मिली थी। एफडीआर (फुल डेप्थ रिक्लेमेशन) तकनीक से बनाई जाने वाली इन सड़कों का निर्माण शुरू होने से पहले मिट्टी का नमूना ठेकेदार और विभागीय इंजीनियरों की देखरेख में एकत्र किया गया। ये नमूने उसी समय सरकार की ओर से मान्यता प्राप्त अलग-अलग लैब (वाराणसी, मेरठ, आगरा) में जांच के लिए भेज दिए गए। अभी तक सिर्फ भलुअनी ब्लाॅक के बखरी से रतसिया, भलुअनी से महुईं श्रीकांत, पैना-गढौना मार्ग समेत पांच सड़कों की रिपार्ट आई है। शेष 30 सड़कों का निर्माण रिपोर्ट नहीं आने की वजह से रुका हुआ है।
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इन सड़कों का अटका है निर्माण

बेलडाड़-देवरिया मार्ग, महेन लबकनी गंगाचक से करायल शुक्ल मार्ग, टी10 बारा से भीखमपुर, लार भाटपाररानी रोड के किमी एक से परासी चकलार मार्ग, मुंडेरा बाबू से नौतन हथियागढ, देवरिया-बसडीला मार्ग, नूरीगंज से सल्लहपुर-बनकटा शिव मार्ग, भटनी-भाटपाररानी मार्ग, खोरीबारी से फतेहपुर, लार-पिंडी, गोबराई से चकिया, महदहा से मजुरी, टी वन से सिरिसिया, घाटी से खैराट, धूस देवरिया से आनंद नगर, नौतन हथियागढ वाया जिगनी राजा, गढ़रामपुर से तिरमुहानी, ककवल खैरा बनुआ चोरिया सोहसर, कोल्हुआ पड़री झिल्लीपार, भटनी से बैकुंठपुर, पथरदेवा से विशुनपुर, पथरदेवा विशुनपुर रोड से कौलमुंडेरा वाया भैसाडाबर, बघौचघाट पकहा रोड से पांडेयपुर वाया सुंदरपुर, चकजगबंधन मिश्रौली से मलघोट विरैचा महुआनी, खुखुंदू नूनखार रोड वाया असना, ससरांव बुजूर्ग से भेलउर मार्ग, सलेमपुर चेरा मार्ग, लार रोड से धरहरा वाया नेमा, रामनगर से दोगारी राजमल, खरवनिया पांडेय मार्ग, सलेमपुर-भाटपाररानी मार्ग से बनकटा आदि सड़कों का निर्माण कार्य रुका है।

मजबूत होती है एफडीआर तकनीक से बनी सड़कें

इंजीनियर अनूप पांडेय ने बताया कि एफडीआर तकनीक से बनी सड़कें आम सड़क की तुलना में कई गुना मजबूत और सस्ती होती है। एफडीआर तकनीक एक रिसाइकिलिंग पद्धति है। इसमें कच्ची सड़क को उखाड़कर सड़क में से निकलने वाली सामग्री को प्लांट पर ले जाया जाता है। यहां पर सड़क के वेस्ट मटेरियल में केमिकल व आवश्यक सामग्री के साथ मिलाकर नया मटेरियल तैयार होता है और फिर उसे वापस से सड़क पर डाला जाता है। हवा के प्रेशर से धूल को साफ करने के बाद उस पर फैलिक कपड़े को बिछाया जाता है, ताकि वह नमी को सोख सके। इसके बाद उसके ऊपर डामर की एक परत डाली जाती है। फिर मटेरियल को उस पर डालकर रोलर चलाया जाता है।
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35 में से पांच सड़कों की जांच रिपोर्ट आ गई है। इनपर काम शुरू हो गया है। शेष 30 सड़कों की रिपोर्ट न आने के कारण निर्माण शुरू नहीं हो पा रहा है। रिपोर्ट आने पर प्रस्तावित स्थल की मिट्टी की मजबूती का पता चल पाएगा। जितनी गहराई पर मिट्टी मजबूत मिलेगी वहीं से निर्माण प्रारंभ किया जाएगा।
-रामअवध यादव,
एक्सईएन ग्रामीण अभियंत्रण विभाग।
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