देवरिया। उत्तर प्रदेश सरकार ने कारखाना में काम करने को लेकर नया कानून लागू किया है। इसके तहत महिलाओं को रात की शिफ्ट में भी काम करने की अनुमति दे दी गई है।
इस कानून के लागू होने के बाद महिलाएं पुरुषों से कामकाज में बराबरी को लेकर उत्साहित हैं, पर सुरक्षा की चिंता सताने लगी है। महिलाओं ने बातचीत में अपनी समस्याएं साझा कीं।
परिषदीय विद्यालय में शिक्षिका शीला चतुर्वेदी का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कई उपाय सरकार कर रही है। मिशन शक्ति 5.0 चल रहा है। इसके बाद भी आए दिन कुछ न कुछ खबरें महिलाओं से अपराध की आती रहती हैं।
इसलिए नाइट शिफ्ट में ड्यूटी की अनुमति तो अच्छी है, पर महिलाओं की सुरक्षा की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए। इसलिए कानून के साथ-साथ सामाजिक परिवर्तन की जरूरत है।
महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल काॅलेज में एमपीडब्ल्यू सोनी तिवारी का कहना है कि अस्पतालों में महिलाएं हमेशा से नाइट शिफ्ट करती आ रही हैं।
हमारे लिए यह अनुमति नई नहीं है, पर रात की शिफ्ट में घर से कार्यस्थल पर जाने के लिए घर के पुरुषों का सहारा लेना पड़ता है।
सलेमपुर सीएचसी में स्टाफ नर्स माधुरी शुक्ला ने कहा कि आज भी हमारा समाज इतना सुरक्षित परिवेश नहीं दे पा रहा है कि उसे घर से रात में आने-जाने में कोई हिचक न हो।
अस्पताल में नाइट शिफ्ट में कार्य करते समय कई प्रकार के लोग आते हैं।
अस्पताल में रात में कई बार परिजन किसी बात को लेकर उलझ जाते हैं। उस समय असहज स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
सुरक्षाकर्मी हमारे पास हर समय नहीं होते हैं। उनके आने तक महिला कर्मचारियों को खुद को संभालना होता है।