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Deoria News: राज्यमंत्री और महंत का दावा फेल... जमीन सरकारी

Sat, 30 Aug 2025 01:23 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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मंदिर के जमीन को विवाद को लेकर पैमाइश करती राजस्व की टीम।
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संवाद न्यूज एजेंसी
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देवरिया। आस्था और राजनीति से जुड़ा मनोकामना पूर्ण हनुमान मंदिर का जमीन विवाद गहराता जा रहा है। शुक्रवार को राजस्व विभाग की टीम ने पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में मंदिर परिसर की जमीन की पैमाइश कर चिह्नांकन किया।
नापी में मंदिर सरोवर के पाथवे से लेकर राज्यमंत्री विजयलक्ष्मी गौतम की पिछली चाहरदीवारी के बीच का हिस्सा बचत की जमीन निकली। राजस्वकर्मियों ने दोनों ओर चूना गिराकर सीमा तय कर दी। इससे साफ हो गया कि न तो महंत का दावा पूरी तरह सही है और न ही राज्यमंत्री का। कोर्ट के आदेश के बाद इस बचत की जमीन पर बनी चहारदीवारी व गेट को जल्द ही ध्वस्त कराया जाएगा।
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राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम व मनोकामना पूर्ण हनुमान मंदिर के उत्तराधिकारी महंत राजेश नारायण के बीच जमीन को लेकर चल रहा विवाद का पन्ना पैमाइश में खुला। नापी के दौरान एक तरफ मंदिर के पोखरे के बगल में निशान लगाया गया तो दूसरी तरफ राज्यमंत्री की भूमि की पश्चिमी सीमा तक चूना गिराया गया। दोनों के बीच का हिस्सा बचत की जमीन निकली, जो सरकारी अभिलेखों में दर्ज है। अधिकारियों ने बताया कि इस जमीन को लेकर न तो मंदिर और न ही मंत्री का स्वामित्व साबित होता है। अब कोर्ट इस बचत भूमि के बारे में विस्तृत जानकारी लेकर निर्णय करेगी।
गौरतलब है कि देवरिया शहर का प्राचीन मनोकामना हनुमान मंदिर श्रद्धा का बड़ा केंद्र है। मंदिर के उत्तराधिकारी महंत राजेश नारायण दास लगातार मंत्री विजयलक्ष्मी गौतम पर कब्जे का आरोप लगाते रहे हैं। उनका कहना था कि मंदिर की भूमि गाटा संख्या 2905 और 2906 में दर्ज है, जबकि मंत्री ने गाटा संख्या 2904 में केवल साढ़े सात डिसमिल जमीन खरीदी है। इसके बावजूद मंदिर की ओर गेट खोलने की कोशिश की जा रही थी। राजस्व अभिलेखों के मुताबिक, गाटा संख्या 2904 में कुल 23 डिसमिल भूमि है, जिसमें कई लोगों का हिस्सा है। इसी में से मंत्री ने 13 मई 2025 को साढ़े सात डिसमिल भूमि का बैनामा कराया। इसकी चौहद्दी में पूर्व की ओर मंदिर का पोखरा (गाटा संख्या 2906), पश्चिम में संकरी सड़क, उत्तर में अन्य लोगों के मकान और दक्षिण में स्थानीय परिवारों की भूमि दर्ज है। मंत्री ने इस जमीन पर 33 लाख से अधिक की स्टाम्प ड्यूटी अदा की थी।
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दीवार और गेट से भड़का तनाव : शुरुआत में मंत्री की ओर से चाहरदीवारी खड़ी की गई थी, जिस पर आपत्ति जताई गई। बाद में गेट का निर्माण शुरू हुआ तो विवाद और भड़क गया। तनाव बढ़ने पर प्रशासन ने गेट सील कर दिया और पुलिस बल की तैनाती कर दी थी। अब नापी के बाद तस्वीर और साफ हो गई है। प्रशासन ने दोनों पक्षों से दस्तावेज तलब कर जांच शुरू कर दी है और कोर्ट के आदेश का इंतजार है।
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