- बुखार, उल्टी-दस्त से पीड़ित बच्चों को लेकर पहुंच रहे तीमारदार
- एक बेड पर दो बच्चों का हो रहा इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मौसम का असर बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। वायरल इंफेक्शन की चपेट में आ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में वायरल बुखार, उल्टी-दस्त के मरीज कम नहीं हो रहे हैं। रोजाना करीब सौ की संख्या में मरीज आ रहे हैं। छोटे बच्चों को तेज बुखार आने के साथ झटका भी आ रहा है। डॉक्टर दवा देने के साथ सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। गंभीर मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। पीआईसीयू का बेड भर जा रहे हैं। एक बेड पर दो-दो मरीजों का इलाज हो रहा है, जिससे मरीजों व तीमारदारों को परेशानी हो रही है। मरीजों को ठीक होने में तीन से पांच दिन लग जा रहा है। वहीं निजी अस्पतालों में भी मरीजों की भीड़ हो रही है।
मौसम बदलने से सेहत बिगड़ रही है। इधर कभी तेज धूप तो कभी बादल छाने से ठंडा हो जा रहा है। इस मौसम में वायरस व बैक्टीरिया का संक्रमण तेज हो जाता है। इसकी वजह से वायरस का संक्रमण बढ़ा है। इससे कम प्रतिरोधक क्षमता होने से बच्चे बीमार हो रहे हैं। वहीं खानपान में गड़बड़ी, साफ-सफाई में लापरवाही से संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं, जिससे बुखार, उल्टी-दस्त, सिर व बदन दर्द, सांस, पेट दर्द, सर्दी, खांसी से पीड़ित हो जा रहे हैं। छोटे बच्चों को तेज बुखार के न उतरने पर झटका भी आ रहा है। मेडिकल कॉलेज में इन दिनों मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। सोमवार को दोपहर तक ओपीडी थी। डॉ. इकबाल व डॉ. स्तुति शुक्ला ने करीब डेढ़ सौ मरीजों का इलाज किया। इसमें सबसे अधिक बुखार के पचास से साठ, उल्टी-दस्त के तीस से पैंतीस मरीज थे, जबकि सांस से पीड़ित करीब बारह, निमोनिया के तीन के अलावा अन्य बीमारी से पीड़ित मरीज थे। गंभीर करीब पांच मरीजों को भर्ती किया गया। मरीज की जांच के बाद दवा देने के साथ सावधानी बरतने की सलाह दी गई। उधर पीआईसी व चिल्ड्रेन वार्ड में बेड खाली होते ही भर जा रहे हैं। पैंतीस बेड पर करीब 42 बच्चों का इलाज चल रहा था। पंद्रह बेड के पीआईसीयू में बीस व बीस बेड के चिल्ड्रेन में बाइस बच्चों का इलाज चल रहा था। दोनों वार्डों में बुखार के 22, उल्टी-दस्त के 11, सांस के पांच, पेट दर्द से पीड़ित दो बच्चे भर्ती थे।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एचके मिश्रा ने बताया कि मौसम बदलने से वायरस ग्रोथ करते हैं। इस समय आरएसवी, इंफ्लूएंजा, पैरा इंफ्लूएंजा, रोटा वायरस का संक्रमण बढ़ जाता है। कम इम्युनिटी होने की वजह से बच्चे वायरल फीवर व उल्टी-दस्त की चपेट में आ जाते हैं। इसके अलावा सांस, पेट दर्द, सर्दी-खांसी, जुकाम से पीड़ित हो जाते हैं। गले में संक्रमण के बाद श्वास नली से वायरस फेफड़े तक पहुंच जाते है, जिससे वायरल निमोनिया होने की संभावना रहती है। छह माह से पांच साल तक के बच्चों को तेज बुखार होने पर झटका की भी संभावना रहती है। ऐसे में बुखार की दवा देने के साथ नार्मल पानी से पट्टी करना चाहिए। बच्चों के पेशाब कम करने और उल्टी बंद न होने पर अच्छी तरह इलाज कराना चाहिए। हाइड्रेशन को मेंटेन करना जरूरी है। बच्चाें को परेशानी होने पर लापरवाही न करें विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क कर इलाज कराएं।
ये बरतें सावधानी
- साफ-सफाई पर ध्यान दें, हाथ धोकर भोजन करें
- पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं, शरीर में कमी न होने पाए
- जंक फूड के सेवन से परहेज करें
- बाजार में सड़क किनारे खुले में बिकने वाली चीजों का सेवन न करें
- उल्टी-दस्त होने पर ओआरएस का घोल दें
- ताजा, सुपाच्य व पौष्टिक भोजन का सेवन करें
- मौसमी फल व साग-सब्जी का सेवन करें
- छोटे बच्चों को छह माह तक मां का दूध पिलाएं