ट्रांजेक्शन फेल कर रुपये उड़ाने वाले गिरोह का सदस्य हिरासत में
देवरिया। बैंक के एटीएम में डिवाइस और लोहे का औजार लगा कर ट्रांजेक्शन फेल करके नकदी उड़ाने वाले अंतरराज्यीय गैंग के एक सदस्य को सीसीटीवी फुटेज के जरिए बैंक के गार्ड ने पकड़ लिया। जबकि तीन सदस्य फरार हो गए। पकड़े गए शातिर से पुलिस पूछताछ कर रही है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह पूर्वांचल के विभिन्न जनपदों में सक्रिय है।
यूनियन बैंक का सदर कोतवाली के सोनूघाट चौराहे पर एटीएम है। यहां से फरवरी और मार्च माह में चार बार एटीएम से छेड़छाड़ कर रुपये निकाल लिए गए थे। अंतिम बार सात मार्च को रुपये निकाले गए हैं। इसी तरह सलेमपुुर, भाटपाररानी, खुखुंदू आदि जगहों पर एटीएम का ट्रांजेक्शन फेल कर रुपये निकालने की घटना हो चुकी है। एटीएम में नकदी डालने वाली कंपनी और गार्ड कई दिनों से सतर्क थे। शनिवार की सुबह सदर कोतवाली के सोनूघाट चौराहे के पास स्थित एटीएम से तीन लोग एटीएम को तोड़कर डिवाइस और लोहे का औजार लगाते हुए सीसीटीवी कैमरे में दिखे। गार्ड ने सक्रियता दिखाई और एक शातिर को आसपास के लोगों के सहयोग से पकड़ लिया। उसके पास लोहे का औजार भी था। गार्ड ने घटना की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने शातिर बदमाश को हिरासत में ले लिया। सीओ साइबर सेल विनय कुमार यादव मामले की जांच कर रहे हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, शुरुआती जांच में पता चला है कि ट्रांजेक्शन फेल करके रुपये उड़ाने वाले गिरोह के सदस्य एटीएम को तोड़ रहे थे। उनसे डिवाइस भी बरामद हुई है। एटीएम में डिवाइस और लोहे का औजार लगाकर पैसे निकालने वाले गैंग ने पूर्वांचल और बिहार के कई जनपदों में वारदातों को अंजाम दिया है। गिरोह एटीएम में छेड़छाड़ कर लाखों रुपयों का चूना लगा चुका है। कोतवाल अनुज कुमार सिंह ने बताया कि बैंक के गार्ड और आसपास के लोगों ने पकड़ कर पुलिस को दिया है। हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। गिरोह के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
गिरोह उड़ा चुका है लाखों रुपये
देवरिया। इस गिरोह ने एटीएम से रुपये निकाले का नया तरीका इजाद किया है। पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य एटीएम में डेबिट और क्रेडिट कार्ड के जरिए ट्रांजेक्शन के लिए पहले जाते थे। एटीएम में पैसा है कि नहीं, इसकी जानकारी करने के लिए पांच सौ रुपये का ट्रांजेक्शन करते थे। इसके बाद एटीएम में किसी के नहीं होने पर लोहे का उपकरण और डिवाइस लगाकर ट्रांजेक्शन फेल कर देते थे। शर्टर असेंबली (जहां से रुपये निकलते हैं) को तोड़कर एटीएम ट्रांजेक्शन फेल कर देते थे। इसके बाद एटीएम कार्ड धारक रुपये निकालने के लिए पहुंचता था तो रुपये नहीं निकलते थे। ट्रांजेक्शन होने पर मशीन पैसा गिनकर बाहर लेकर भी आती थी, लेकिन नोट फंस जाते थे। इसके बाद गिरोह के सदस्य जाकर रुपये को निकाल लेते थे।