संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में मरीजों को बहला-फुसलाकर और अच्छी सुविधा का झांसा देकर निजी अस्पताल भेजने का खेल चल रहा था। अब खून की दलाली करने वाले सक्रिय हो गए हैं।
खून की जरूरत पड़ने पर डोनर न होने से परेशान तीमारदार को खून उपलब्ध कराकर ज्यादा रकम वसूलने का खेल चल रहा है।
ब्लड बैंक से अस्पताल में डिमांड अधिक है। यहां ब्लड की कमी है। सत्तर यूनिट ब्लड है। जून माह में लगने वाले शिविर से कमी को दूर करने के प्रयास में कर्मी जुटे हैं।
मेडिकल कॉलेज में जिले के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा बिहार के सीमावर्ती इलाके से मरीज आते हैं। अस्पताल में भर्ती मरीज को ब्लड की जरूरत पड़ने पर बिना डोनर के ब्लड नहीं मिल पाता है। दलाल अस्पताल परिसर घूमते रहते हैं तो बाहर की दुकानों पर मौजूद रहते हैं। डोनर न होने से परेशान तीमारदार को देखकर उन्हें अपनी बातों में फंसा लेते हैं और मोलभाव करते हैं। छह से आठ हजार रुपये के बीच में तय करते हैं।
इसके बाद ब्लड उपलब्ध कराने का आश्वासन और एडवांस में कुछ रुपये लेने के बाद निकल जाता है। अपने किसी परिचित को पैसा का लालच देकर रक्तदान कराकर उसके बदले ब्लड लाकर तीमारदार को देकर शेष रकम वसूल करता है।
एक मरीज के तीमारदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उसकी बेटी भर्ती थी। एक यूनिट ब्लड चढ़ने के बाद और यूनिट की जरूरत थी। ब्लड बैंक पर खून के बदले खून देने का नियम है। मैं खून देने पहुंचा तो उम्र अधिक होने के कारण मना कर दिया गया है। परेशान था कुछ समझ में नहीं आ रहा।
इसी बीच एक युवक मिला और ब्लड उपलब्ध कराने को कहा और कागज व पांच सौ रुपये लेकर चला गया। कुछ देर बाद ब्लड बैंक खोजते पहुंचा तो एक युवक रक्तदान किया और ब्लड लाकर बाहर दे दिया। इसके बाद शेष पैसा ले लिया।
एक वर्ष में 34 शिविर लगाए गए। इसमें 463 यूनिट ब्लड एकत्र किया गया। इसमें अस्सी प्रतिशत ब्लड अस्पताल में भर्ती मरीज को दिया गया, जबकि मात्र बीस प्रतिशत ही बाहर के मरीजों के लिए दो हजार रुपये लेकर पीआरबीसी ब्लड दिया जाता है, जबकि होल ब्लड यहां उपलब्ध नहीं रहता है। इस समय ब्लड कम है। ब्लड बैंक में 70 यूनिट ब्लड है।