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Deoria News: रहें सावधान, हल्दी में रंग और काली मिर्च में पपीते का बीज मिला रहे धंधेबाज

Fri, 21 Feb 2025 01:45 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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संवाद न्यूज एजेंसी
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देवरिया। औषधीय गुणों वाली हल्दी, गले को राहत देने एवं खाने को जायकेदार बनाने में प्रयोग होने वाली काली मिर्च व बहुपयोगी बेसन में भी मिलावट करने से धंधेबाज बाज नहीं आ रहे हैं। हल्दी में वजन बढ़ाने के लिए पीले रंग की कोटिंग की जा रही है, वहीं चमक के लिए लेड क्रोमेट मिलाते हैं। ऐसे में जिस हल्दी को आप खा रहे हैं, हो सकता है कि ऊपर से चमकती नजर आए पर अंदर से वह खराब गांठ वाली हो सकती है। मुनाफे के लिए खराब गांठ के ऊपर इसकी कोटिंग कर बेच दिया जा रहा है। जो सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि मिलावट वाला बेसन, काली मिर्च व हल्दी का खाने में प्रयोग स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है।
खाद्य विभाग की लगातार सजगता के बावजूद धंधेबाजों ने मुनाफा कमाने के चक्कर में खाने पीने के हर चीज में मिलावट कर रखी है। जिले में हर माह एक करोड़ रुपये की काली मिर्च में बारीकी मिलावट कर उसे खपा दिया जा रहा है। इसमें पपीते और भिंडी का बीज के साथ ही टेस्ट के लिए केमिकल मिला दिया जा रहा है। शाहजहांपुर व कानपुर से आने वाली काली मिर्च में धंधेबाज पहले ही यह खेल कर दे रहे हैं। मिलावट वाला माल पकड़ में न आए, इसके लिए ट्रांसपोर्ट की बिलिंग कर मंडी तक लाया जाता है। बाजार से जुृड़े सूत्रों के अनुसार इसमें कानपुर, दिल्ली व शाहजहांपुर के धंधेबाज ज्यादा जुड़े हैं। वहीं जिले के हर घर में हल्दी का प्रयोग होता है। सेहत के लिहाज से इसे काफी फायदेमंद माना जाता है। हल्दी में मौजूद औषधीय गुण इसे सबसे शक्तिशाली मसालों में से एक बनाते हैं। मिलावटखोरों ने इसे भी जहरीला बना दिया है। मिलावटी हल्दी की सप्लाई कानपुर से सीधे की जा रही है। गांव-देहात के कस्बों में कच्ची हल्दी (20 से 25 रुपये प्रति किलोग्राम) के भाव से थोक में मिलावटखोर खरीदकर कानपुर भेज देते हैं। वहां इसमें से जो अच्छी गांठ होती है उसे अलग कर लिया जाता है। खराब हल्दी के ऊपर पीले रंग या लेड क्रोमेट की कोटिंग कर दी जाती है, जिससे उसमें चमक आ जाती है। इसके बाद दोनों को मिलाकर बाजार में पहुंचाया जाता है। चमकाने के बाद इसका भाव 250 से 300 रुपये प्रति किलोग्राम हो जाता है। इसी गांठ को पीसकर धंधेबाज बेच देते हैं और मोटा मुनाफा कमाते हैं। जिले में हर माह लगभग 500 क्विंटल हल्दी की खपत होती है। इसमें करीब 30 प्रतिशत माल मिलावटी है। वहीं खाद्य विभाग की ओर से लिए गए नमूने में बाजार में बेसन में मिलावट होने की पुष्टि भी हुई है। गल्ला मंडी में ही संचालित कई बेसन की दुकानों एवं चक्की मशीनों पर चना व मटर दोनों को पिसते हुए कई दुकानदार दिखे।
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व्यापारियों को किया जाता है सजग
जनपद व्यापार मंडल के अध्यक्ष अखिलेश जायसवाल ने बताया कि खाद्य पदार्थों में मिलावट न हो, इसके लिए व्यापारियों को सजग किया जाता है। सेहत से जुड़ा कोई भी सामान जो हानिकारक है, उसे बेचना अपराध की श्रेणी में आता है । मिलावट की वजह से सही माल बेचने वाले व्यापारियों को परेशानी होती है।
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