शहर के जर्जर भवनों से हादसों का डर
कामर्शियल इलाकों में हैं कई भवन, जर्जर भवनों का सर्वे तक नहीं कराती नगर पालिका
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। नगर प्रशासन की लापरवाही आम लोगों की जान पर कभी भी भारी पड़ सकती है। खतरा शहर में बने उन जर्जर भवनों से हैं, जिनकी दीवारें छत का भार रोकने में सक्षम नहीं रह गई हैं। किसी का खंभा क्षतिग्रस्त है तो किसी भवन का आधा हिस्सा बारिश या भूकंप के चलते पहले ही धराशायी हो चुका है। फिर भी लोग उसमें शोरूम खोलकर सुबह से शाम तक ग्राहकों की भीड़ जमा कर रहे हैं। कई ऐसे भी हैं जो टूटती छत के नीचे तिरपाल के सहारे परिवार समेत जीवन-यापन कर रहे हैं।
जर्जर भवनों की संख्या शहर में दर्जन भर से अधिक होने के बावजूद नगर पालिका के पास इसका कोई आंकड़ा मौजूद नहीं है। पालिका अपने स्तर से जर्जर भवनों का सर्वे तक नहीं कराती है। आम लोगों की जो शिकायतें आती हैं। उन्हें तकनीकी सुविधाओं के अभाव में नजरअंदाज कर दिया जाता है। कामर्शियल इलाकों में कई भवन ऐसे हैं, जिनके गिरने पर बड़ा हादसा हो सकता है। आसपास की नई इमारतें भी इनकी चपेट में आ जाएंगी। इसमें कुछ सरकारी कुछ प्राइवेट भवन शामिल हैं।
इनसेट
यहां है जर्जर भवन गिरने का खतरा
स्टेशन रोड
रेलवे स्टेशन रोड पर स्टेशन के सामने एक दो मंजिला भवन जर्जर हो चुका है। ईंट से निर्मित छत टूटकर गिर रही है। ऊपर की मंजिल के पाए टूट चुके हैं। फिर भी उसमें जिला सहकारी संघ लिमिटेड का आफिस खोला गया है। कई लोगों के आवास और दुकानें हैं। यहां सैकड़ों की संख्या में लोग खाद-बीज लेने के लिए जुटते हैं।
सब्जी मंडी
सब्जी मंडी में एक दो मंजिला भवन ऐसा है, जिसके ऊपर नजर पड़ते ही लोगों को उसके गिरने का भय सताने लगता है। कुछ दिनों पहले ऊपर की मंजिल पर लोग परिवार समेत रहते थे। अचानक सीढ़ी और भवन का कुछ हिस्सा ढह जाने के बाद आवास का उपयोग तो बंद हो गया, लेकिन नीचे के तल पर दुकानें अभी भी चल रही हैं। यहां सुबह नौ बजे से देर रात तक लोगों की भीड़ रहती है।
मालवीय रोड
कसया ओवरब्रिज के बगल स्थित दो मंजिले भवन के आगे का हिस्सा टूटकर गिर चुका है। छत के सरिया में ईंट पत्थर लटके हुए हैं। फिर भी नीचे के तल पर जूता-चप्पल की दुकान चल रही है। पूरे दिन यहां ग्राहकों का आना-जाना लगा रहता है। तेज बारिश या हल्के भूकंप के झटके कभी भी यह मकान धराशायी हो सकती है।
रागिनी मोड़
रागिनी मोड़ के समीप एक दो मंजिला भवन विवाद में है। भवन का आधे से अधिक हिस्सा बारिश में ढह चुका है। फिर भी तीन परिवार उस पर कब्जा जमाए रखने के इरादे से जोखिम मोल ले रहे हैं। उनका परिवार तिरपाल तानकर जर्जर भवन में रह रहा है। इनमें कई छोटे-छोटे बच्चे भी हैं।
वर्जन
छह माह पूर्व मेरी तैनाती नगर पालिका में हुई है। इस दौरान जर्जर भवनों की सूची नहीं बनी है। पहले सर्वे हुआ है कि नहीं इसकी जानकारी नहीं है।
- जयराम यादव, एई नगर पालिका परिषद देवरिया।