देवरिया। सदर तहसील में स्टांप वेंडर अजय कुमार मिश्रा प्रॉपर्टी डीलिंग का भी काम करते थे। जमीन की खरीद-बिक्री उनका पुराना धंधा था। अच्छी जमीन उचित दर पर मिलने पर उसकी खरीदारी कर उसे बेच देते थे।
इस कार्य में उनके साथ धुसवा चौराहे का एक व्यक्ति भी पार्टनर था। कुछ माह पहले एक जमीन सस्ती मिलने पर अजय ने अपने पार्टनर के साथ खरीद ली। यही नहीं पार्टनर को करीब 20 लाख रुपये भी दिए थे।
अजय की पत्नी सरिता मिश्रा ने बताया कि करीब एक माह पहले से वह खरीदी गई उस जमीन को बेचना चाहते थे। इसके एवज में उन्होंने अपने पार्टनर धीरेंद्र उपाध्याय से बातचीत की भी की थी। वह पहले राजी हो गए। इसके बाद उनके स्तर से आनाकानी शुरू हो गई।
यह बात मेरे पति नहीं समझ पाए। इसके बाद उन्होंने जमीन संबंधित कागजात को देखा तो सन्न रह गए। मेरे पति के पार्टनर धीरेंद्र ने जमीन संबंधित कागजात को अपने नाम करा लिया था। यह देख पति ने जमीन खरीद में लगे रुपये के साथ दिए गए 20 लाख रुपये शीघ्र वापस करने की बात कही थी। 11 दिसंबर की शाम में पति के पार्टनर धीरेंद्र ने फोन कर एक पार्टी में जाने के लिए बुलाया।
उसने कहा कि मेरे दोस्त संजय दूबे के घर पर पार्टी है। इसके बाद वहां बुलाकर सुनियोजित तरीके से पति को मौत के घाट उतारने की नियत से सिर पर वार कर दिया, जिससे वह अचेत हो गए। इसके बाद चुपके से ले जाकर मेडिकल कॉलेज देवरिया में भर्ती करा दिया, जहां पर मेरे पति के दोस्त ने अपने बड़े भाई से फोन करवा कर छत से गिरकर घायल होने की बात बताई।
इसके बाद हमलोग उन्हें लेकर इलाज कराने लखनऊ गए, जहां उनकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम में सिर के बाएं हिस्से में गंभीर चोट के निशान मिले है। सरिता पति के मित्र धीरेंद्र उपाध्याय, चौकीदारी पवन कुमार, मकान मालिक संजय दूबे व अज्ञात चार से पांच लोगों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है।
चार दिनों में एक बार भी परिजनों ने नहीं किया पुलिस से संपर्क : स्टांप वेंडर के घायल होने से इलाज होने तक के बीच में एक बार फिर भी उनके परिजनों ने पुलिस को कोई सूचना नहीं दी।
थानाध्यक्ष कंचन राय ने बताया कि मौत होने के बाद पोस्टमार्टम कराकर परिजन मौके पर पहुंचे और सड़क जाम कर दिए। परिजनों ने पुलिस को सूचना नहीं दी थी।