संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। सहालग का समय चल रहा है। इस दौरान जिले में मिठाइयों की बिक्री बढ़ गई है। ऐसे में मिलावटखोर भी सक्रिय हो गए हैं। वहीं खाद्य सुरक्षा और औषधि विभाग की टीम समय-समय पर मिठाई की दुकानों का निरीक्षण कर दुकानदारों को मिठाई की ट्रे पर बेस्ट बिफोर लिखने, यानी इस्तेमाल की समयसीमा को कहता है। फिर भी शहर के कई दुकानदार यह नहीं लिख रहे।
वहीं पिछले दिनों खाद्य विभाग ने कनक स्वीट हाऊस से एक केक और दो मिठाई के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा है। वहीं चिकित्सक मिठाइयों को जांच-परख कर खरीदने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है मिलावटी और बासी मिठाई खाने से सेहत को खतरा हो सकता है। कुछ दुकानदारों ने कहा कि वह मौखिक रूप से ग्राहकों को जानकारी दे रहे हैं।
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने मिठाइयों की ट्रे पर बेस्ट बिफोर (कब तक खाने योग्य) तिथि अंकित करने के निर्देश दि हैं, ताकि लोगों को पता चल सके कि मिठाई की गुणवत्ता कब तक बरकरार रहेगी।
ग्राहकों का आरोप है कि कुछ हलवाई और मिठाई विक्रेता इस नियम का पालन नहीं कर रहे हैं। वे मिठाई की ट्रे पर एक्सपायरी डेट लिखने से बच रहे हैं। एक्सपायरी डेट न लिखने से पता नहीं चलता कि मिठाई कितनी पुरानी है।
दुकानों में बिकने वाली मिठाइयां गुणवत्ता के मापदंडों को अंगूठा दिखा रही हैं। खोआ में पाम ऑयल, वनस्पति तेल, वेजिटेबल फूड ऑयल और रिफाइंड ऑयल आदि की मिलावट की जा रही है और उससे मिठाइयां बनाई जा रही हैं। जिम्मेवार अधिकारी सब कुछ जानने-समझने के बावजूद इसे रोकने के बजाय हाथ-पर-हाथ धरे बैठे हैं।
संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने मंगलवार को शहर में बस स्टैंड के सामने स्थित तीन से चार दुकानों का जायजा लिया तो कहीं पर भी मिठाइयों के ट्रे पर बेस्ट बिफोर नहीं लिखा मिला। यही हाल रेलवे स्टेशन रोड की एक मिठाई की दुकान पर भी है। दुकानदार कीमत लिख दे रहे हैं, मगर बेस्ट बिफोर लिखने से कतरा रहे हैं।