देवरिया। जिले के कुछ गांवों में द्वितीय चक्र की चकबंदी तैयारी शुरू हो गई है। चकबंदी आयुक्त ने भाटपाररानी के 25 और बरहज के एक गांव का गजट कर दिया है। अब शासकीय गजट का इंतजार है। इसके लिए मुद्रक एवं लेखन सामग्री निदेशक इलाहाबाद को चकबंदी आयुक्त ने पत्र भेजा है।
जिले में 70 के दशक में चकबंदी की प्रक्रिया पूरी हुई थी। उसके 35 वर्षों बाद दोबारा चकबंदी के लिए भाटपाररानी के 100 गांवों का प्रस्ताव जिले से शासन को भेजा गया था। उन गांवों में घांटी तप्पा के अगल-अगल के 25 गांवों का गजट चकबंदी आयुक्त ने कर दिया है। इसमें अमवा, मायापुर, इमिलिया, रायबारी, मोतीपुर टिकैत, धर्मखोर बाबू, गोपालपुर, अलावलपुर, रानीघाट, खुटहा, चूहिया, बांसघाटी, घांटी, पडौली, सिहपुर, बनकटा तिवारी, पिपरा विठ्ठल, लालचक, खैराट, मोतीपुर भुवाल, भड़सर, नोनार कपरदार, मठदेव गिरी, बडहरिया शामिल हैं। इसके अलावा बरहज के एक गांव तेलिया कुर्मी खादर में भी चकबंदी की तैयारी है। चकबंदी विभाग ने भाटपाररानी के 74 गांवों का प्रस्ताव दोबारा भेजा है। इस बाबत सहायक चकबंदी अधिकारी मनोज कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि शासकीय गजट के लिए इलाहाबाद पत्र भेजा गया है। शासकीय गजट होने के बाद ही कार्रवाई शुरू की जाएगी।
चकबंदी में फंस सकता है पेंच
देवरिया। जिन गांवों में चकबंदी की तैयारी शुरू करने की तैयारी है। उनमें दस गांव ऐसे हैं जहां की जमीन हथुआ-भटनी रेल लाइन परियोजना के लिए अधिग्रहीत की जानी है। इस परियोजना के विरोध में किसान पांच साल से विरोध कर रहे हैं। फिलहाल, जिला प्रशासन ने उन जमीन का अभिलेखीय कब्जा रेलवे को दे दिया है। विरोध के कारण प्रतिकर निर्धारण की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से अवार्ड की प्रक्रिया रुकी है। रेलवे ने इस प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में भी डाल दिया है। उधर, चकबंदी प्रक्रिया शुरू होने परउन जमीन को लेकर पेंच फंस सकता है। सहायक चकबंदी अधिकारी कहते हैं कि दिक्कत आने पर देखा जाएगा।