देवरिया। झमाझम बारिश में देवरिया का हाल भी मुंबई, दिल्ली और गोरखपुर जैसा हो सकता है। यहां भी शहर में जलनिकासी के लिए बने नाले जाम हैं। बारिश पूर्व सफाई के नाम पर सिर्फ कोरम पूरा किया गया है। घरों का गंदा पानी निकलना ही मुश्किल हो रहा है। बिना बारिश के ही नाले बजबजा रहे हैं। ऐसे में तेज बारिश हुई तो शहरवासियों का जलजमाव से जूझना तय है।
नगरपालिका क्षेत्र में कुल 18 बड़े और 10 मझोले नाले हैं। इनके अलावा प्रत्येक वार्डों में रास्ते के दोनों तरफ नालियां बनाई गई हैं। शहर के सभी नालों की सफाई 15 जून से पहले ही कराने का शासनादेश था। बावजूद इसके पालिका प्रशासन लापरवाह बना रहा। तमाम बड़े और मझोले नालों की सफाई का कार्य अब तक चल रहा है। इस साल नगरपालिका नौ बड़े नालों की सफाई खुद के सफाईकर्मियों से करा रही है। बाकी नौ नालों की सफाई के लिए अलग-अलग टेंडर निकाले गए थे। इसके लिए करीब 40 लाख रुपये धनराशि आवंटित की गई है। नगरपालिका प्रशासन की उदासीनता के चलते ठेकेदार बिना काम कराए ही सरकारी धन हड़पने के प्रयास में हैं। नालों में करीब तीन फुट तक कचरा जमा पड़ा है। ऊपर से पॉलीथिन आदि साफ कर दिए गए हैं। नीचे कचरा जमा होने के चलते नाले चोक हैं। पानी का बहाव नहीं हो पाने से दुर्गंध बढ़ गई है।
नाला सफाई में बरती गई है लापरवाही
महिला डिग्री कॉलेज के उत्तर तरफ बड़ा नाला चोक है। सीसी रोड के दोनों तरफ के नाले जाम हैं। मृदा परीक्षण विभाग के सामने जलभराव है। कुछ ऐसे ही हालात भीखमपुर रोड स्थित दोनों साइड के नालों के हैं। भटवलिया चौराहे पर पश्चिमी नाले का पानी नहीं निकल पाने से पानी बहकर सड़क तक आ जाता है। वार्डों के अंदर की नालियों में ज्यादातर की हालत खस्ता है।
देवरिया-सलेमपुर मार्ग पर फोरलेन निर्माण के चलते नालों में पत्थर और मिट्टी आ गया है। नाले की दीवार भी टूट गईं हैं। यहां पानी बहाव को लेकर थोड़ी समस्या जरूर है। बाकी जगहों पर नाला सफाई ठीक से हुआ है। फिर भी इनकी निगरानी कराई जाएगी। नगरपालिका की ओर से हर हाल में सफाई व्यवस्था बेहतर रखने का प्रयास किया जा रहा है।
-अलका सिंह, नगरपालिका अध्यक्ष।