संवाद न्यूज एजेंसी
तरकुलवा। विकास खंड के ग्राम नारायणपुर में लाखों रुपये खर्च कर बनाया गया अमृत सरोवर सिर्फ कागजों में दुरुस्त है। लेकिन, धरातल पर इसमें पानी की जगह घास-फूस, कूड़ा-करकट भरा है। चहारदीवारी व सीढ़ी टूट गई है और सरोवर के चारों किनारे बनी आरसीसी सड़क क्षतिग्रस्त है। जबकि जिम्मेदार कागजों में खानापूर्ति कर सरोवरों के दुरुस्त होने का दावा कर रहे हैं।
सरकार की महत्वाकांक्षी ‘अमृत सरोवर’ योजना के तहत जल संरक्षण और ग्रामीण सौंदर्यीकरण के उद्देश्य के वित्तीय वर्ष 2023-24 में ग्राम पंचायत नारायणपुर में करीब 27 लाख रुपये खर्च किए गए। ‘अमृत सरोवर’ का निर्माण गांव के पोखरी अराजी संख्या 840 रकबा 0.1170 हेक्टेयर में कराया है। ग्रामीणों का आरोप है कि अमृत जलाशय के निर्माण के लिए जरूरी रकबा कम होने पर ग्राम प्रधान व सचिव ने जिम्मेदार अधिकारियों से मिलीभगत कर गांव में काफी दूर की एक दूसरी पोखरी अराजी नंबर 0.1210 हेक्टेयर को जोड़ कर रकबा पूरा दिखा दिया।
इस योजना के तहत घाट निर्माण, सीढ़ी, साफ-सफाई, बाउंड्री वॉल, आरसीसी सड़क आदि शामिल थीं। इसके बावजूद वर्तमान में सरोवर की स्थिति बेहद दयनीय बनी हुई है। इस सरोवर में पानी नहीं है। जलाशय की सतह पर घास-फूस, कूड़ा-करकट और गंदगी का अंबार लगा है। चहारदीवारी व रेलिंग बनने के कुछ दिन बाद ही टूटकर क्षतिग्रस्त हो गई। अमृत सरोवर के चारों तरफ बनी आरसीसी सड़क टूट चुकी है, जिस पर घास और झाड़ियां है। घाट परे बनाई गई सीढ़ियां भी टूट गई हैं जो निर्माण कार्य में बरती गई अनियमितता की कहानी बयां कर रही है। गांव के रहने वाले सरफराज अहमद, गोविंद चौहान, बेचू प्रसाद, गोवर्धन मद्धेशिया आदि का कहना है कि सरकार ने तो अच्छा काम शुरू किया था, लेकिन काम कराने वाले लोगों ने खूब धांधली की है। 27 लाख रुपये खर्च करने के बाद भी सरोवर की दशा बदहाल है। इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।