देवरिया। कुपोषण से जूझ रहे बच्चों के लिए जिला महिला अस्पताल का पोषण पुनर्वास केंद्र वरदान साबित हो रहा है। यहां दवा के साथ पौष्टिक आहार देकर बच्चों की सेहत सुधारी जा रही है। केंद्र में हर माह औसतन 16 अति कुपोषित बच्चे भर्ती होते हैं।
इस तरह सालभर में करीब 200 बच्चों को कुपोषण से उबारने का प्रयास किया जा रहा है। केंद्र में एक साथ 10 बच्चों को भर्ती करने की व्यवस्था है। यहां आने वाले अधिकतर बच्चों का वजन उनकी उम्र के अनुसार कम होता है।
चिकित्सक जांच के बाद कुपोषण की गंभीरता के आधार पर उपचार शुरू करते हैं। शुरुआती चरण में बच्चों को एफ-75 और हालत में सुधार होने पर एफ-100 उपचारात्मक आहार दिया जाता है। इसके बाद घर में तैयार होने वाले पौष्टिक भोजन की आदत डालकर उन्हें छुट्टी दी जाती है।
पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चों की जांच, दवा और भोजन की सुविधा निशुल्क है। उपचार के दौरान सरकार की ओर से माताओं के बैंक खाते में प्रतिदिन 100 रुपये की सहायता राशि भी भेजी जाती है।
चिकित्सकों के मुताबिक, जन्म के शुरुआती छह महीने तक मां का दूध नहीं मिलना, गरीबी, अशिक्षा, स्वच्छता और पोषण संबंधी जानकारी का अभाव कुपोषण के प्रमुख कारण हैं। छह महीने के बाद बच्चों को पर्याप्त पूरक आहार नहीं मिलने और दो बच्चों के जन्म के बीच कम अंतर होने से भी उनकी सेहत प्रभावित होती है।