सपा के गढ़ में चित हुई हाथी, खिला कमल
मतगणना के दौरान भाटपाररानी में ज्यादा अंतर से आगे रही भाजपा
मोदी लहर में कुशवाहा मतों को तोड़ने में नाकाम हुए बसपा के आरएस
नीलांबुज मिश्र
देवरिया। कभी समाजवादियों और कांग्रेस का गढ़ सलेमपुर सीट मोदी लहर में लगातार दूसरी बाद भाजपा के पाले में चली गई। सपा-बसपा गठबंधन के बावजूद भाजपा की ऐसी आंधी चली कि हाथी चित हो गई और कमल खिल गया। देवरिया से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी और सलेमपुर से रविंद्र कुशवाहा को लोगों ने सिर आंखों पर बैठाया है।
आजादी के बाद सर्वाधिक दोनों सीटों पर कांग्रेस का कब्जा रहा। बाद में सलेमपुर और देवरिया सीट कई बार सपा और बसपा के कब्जे में रही। देवरिया से पूर्व सांसद मोहन सिंह दो बार और एक बार बसपा से गोरख प्रसाद जायसवाल सांसद चुने गए थे। वहीं सलेमपुर संसदीय सीट पर सपा से एक बार पूर्व सांसद हरिवंश सहाय और दूसरी बार हरिकेवल प्रसाद सांसद चुुने गए। बसपा से बब्बन राजभर और रमाशंकर विद्यार्थी का कब्जा रहा। वर्ष 2014 की मोदी लहर में सभी पार्टियों का सूपड़ा साफ हो गया था। इसे रोकने के लिए इस बार सपा-बसपा समेत कई पार्टियां एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरी थी। बसपा के खाते में सीट होने के कारण देवरिया से विनोद जायसवाल और सलेमपुर से बसपा के प्रदेश अध्यक्ष आरएस कुशवाहा चुनाव लड़ रहे थे, लेकिन मोदी के सामने गठबंधन का जादू नहीं चला और दोनों प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा। भाटपाररानी विधानसभा से सर्वाधिक मत मिलने की उम्मीद गठबंधन प्रत्याशी को थी, क्योंकि सपा के विधायक होने के कारण आशुतोष उपाध्याय ने पूरा जोर लगा दिया था। बावजूद भाटपाररानी विधानसभा में भारी मतों से भाजपा की जीत हुई। सलेमपुर विधानसभा में गठबंधन और भाजपा का परिणाम कुछ बूथों पर एक समान देखा गया।
साफ हुआ रुझान तो उड़ता गया चेहरा
मतगणना के दौरान राजनीतिक पार्टियों के एजेंट जोश से लबरेज दिखे। ज्यो-ज्यो रुझान आता गया, त्यो-त्यो गठबंधन और कांग्रेस पार्टियों के एजेंटों का चेहरा उतरता गया। दोपहर बाद सातों विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा की बढ़ता हुई तो अधिकांश गठबंधन और कांग्रेस के एजेंट टेबल से हटने लगे।
बूथों का आंकड़ा देख बसपा प्रत्याशी हुए चिंतित
मतगणना स्थल पर सलेमपुर के बसपा प्रत्याशी आरएस कुशवाहा पहुंचे। बूथों पर मतों का आंकड़ा देख वह चिंतित हो गए। परेशान एजेंटों ने बोला कि उम्मीद से कम मत बूथों पर मिल रहे हैं। वह सलेमपुर और भाटपाररानी टेबल के एजेंटों से मिलकर जानकारी लिए और बलिया के निकल गए।