रुद्रपुर/एकौना। दोआबा और कछार के 116 गांवों में बाढ़ की आशंका को लेकर कोहराम मचा है। बंधों की जर्जर दशा बाढ़ प्रभावित दो लाख की आबादी की नींद हराम हो गई है। बंधों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रहा बाढ़ खंड बंधों की मरम्मत पर अब तक 80 लाख रुपये खर्च कर चुका है। बावजूद इसके रेनकट्स और रैटहोल मुंह बांए हैं।
रुद्रपुर क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित इलाके में सिंचाई विभाग गोर्रा और राप्ती नदी पर करीब 100 किलोमीटर बांध बनवाया है। दोआबा और कछार के 116 गांवों की रक्षा के लिए बने बंधे शाही की मांद से छलनी हो चुके हैं। रैट होल और रेनकट्स से कई जगह बंधे धंस गए हैं। बरसात की पहली मुसलाधार बारिश में बंधों की हालत देखकर बाढ़ से कोहराम मचना तय है। विभाग की ओर से बंधों की मरम्मत और बाढ़ सुरक्षा के नाम पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। इस साल भी करीब 80 लाख खर्च हो चुके हैं। लेकिन धरातल पर काम दिखाई नहीं दे रहा। राप्ती पर बना दोआबा का सबसे लंबा तटबंध तिघरा मराछी पर कदम-कदम पर खतरा मंडरा रहा है। करीब 17 किलोमीटर लंबे बांध पर राप्ती नदी तीन जगह भीषण कटान कर रही है। गोर्रा नदी पर पिड़रा करनपुर, पिड़रा भुसवल, नकईल सेमरौना सहित आधा दर्जन बांधों की हालत दयनीय है। सपा नेता हरेंद्र सिंह त्यागी ने सिंचाई विभाग पर मरम्मत के नाम पर घोटाले का आरोप लगाया। एसडीएम घनश्याम ने कहा कि बंधों की मरम्मत में लापरवाही करने वाले अभियंताओं के खिलाफ रिपोर्ट की जाएगी।