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पाल्थिन पर रोक का दिखा असर,बाजार आए लोगों के हाथों में दिखा झोला

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कपडे़ के झोले में सब्जी की खरीदारी करते लोग। - फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। पॉलिथीन पर प्रतिबंध का असर पहले दिन से ही दिखने लगा है। खरीदारी के लिए निकले अधिकांश लोग घर से ही झोला लेकर आए। जिनके पास झोला नहीं था, उन्हें बाजार में सामान से पहले झोला खरीदना पड़ा। हालांकि प्रशासनिक सुस्ती के चलते कई क्षेत्रों में लोग धड़ल्ले से पॉलिथीन का इस्तेमाल करते भी दिखे। पहले दिन प्रशासन की ओर से न कोई जागरुकता अभियान शुरू हुआ और न ही कहीं कोई कार्रवाई हुई। वह रविवार की छुट्टी मनाते रहे। जिम्मेदारों का कहना था कि जांच अभियान सोमवार से शुरू किया जाएगा।
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प्रदूषण बढ़ाने में पॉलिथीन के अहम भूमिका को देखते हुए सरकार ने प्रदेश में पॉलिथीन को प्रतिबंधित कर दिया है। अब 50 माइक्रॉन से कम की पॉलिथीन में सामान बेचने-खरीदने पर रोक है। पकड़े जाने पर जुर्माने और सजा का प्राविधान किया गया है। शासन के फैसले के बाद वैसे तो तमाम दुकानदारों ने पहले से ही तैयारी कर ली थी। कागज, कपड़ा या जूट के बैग मंगा लिए गए थे।
पॉलिथीन का जो स्टॉक बचा था, उसे भी शनिवार को ही खपा लिया था। दुकानदारों का कहना है कि सरकार की यह कोशिश प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए है, लिहाजा वह पूरा सहयोग करेंगे। ग्रामीण क्षेत्र के कुछ दुकानों पर पॉलिथीन की बिक्री जारी रही। इस बाबत डीएम सुजीत कुमार का कहना था कि पॉलिथीन पर प्रतिबंध का पालन कराने के लिए सभी एसडीएम-सीओ को जिम्मेदारी दे दी गई। सोमवार से अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। नगर पालिका रोड के कपड़ा व्यापारी अनूप मिश्र ने बताया कि इससे पूर्व 2012 में भी हम लोगों ने पॉलिथीन को बैन किए जाने में सरकार का सहयोग किया था। इस बार भी सहयोग किया जाएगा। यह मानव जाति के हित में लिया गया निर्णय है। ग्राहक भी इसमें सहयोग करें और प्रशासन को भी इसे अच्छे से लागू कराना होगा। केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रणजीत सिंह ने बताया कि शहर से लेकर गांव तक के लोग पॉलिथीन से परेशान हैं। शहरों में तो नालियों के जाम रहने का प्रमुख कारण यही है।
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सरकार का निर्णय सही है और इसे पूर्ण रुप से कड़ाई से लागू करना चाहिए। व्यापारी इसमें हर स्तर से सहयोग के लिए तत्पर रहेंगे। देवरिया रामनाथ के अतुलमणि त्रिपाठी ने बताया कि पॉलिथीन का इस्तेमाल हम भी नहीं चाहते, मगर मजबूरी में लेना पड़ता है। अब इस पर पूरी तरह प्रतिबंध होगा तो लोगों की आदत भी बदल जाएगी। सरकार का फैसला सराहनीय है, बशर्ते फिर से कदम पीछे न खींचे जाएं। हर वर्ग इसमें सहयोग करेगा। ग्राहक आनंद मोहन गुप्ता ने बताया कि यह निर्णय बहुत पहले ले लिया जाना चाहिए था। खैर देर आए दुरुस्त आए। प्लास्टिक पर सख्त रवैया नहीं अपनाए जाने से हमारा वातावरण प्रदूषित हो रहा था। सरकार ने निर्णय ले लिया है तो अब प्रशासन इसे सख्ती से लागू कराए।

यह है पॉलिथीन से नुकसान
पॉलिथीन जल्दी नष्ट न होने से भूमि की उर्वरा शक्ति समाप्त होती ही है, भूजल स्तर भी कम होने लगता है। इसके प्रयोग से सांस, त्वचा संबंधी रोग उत्पन्न होते हैं। कैंसर में भी पॉलीथिन का बड़ा योगदान है। प्लास्टिक के अत्यधिक चलन के कारण देश में स्वच्छता अभियान को भी धक्का लग रहा है। नालियों में जमा पॉलीथिन जल निकासी में बाधक बन रहे हैं। जल जमाव होने से मच्छर जनित बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।
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