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वित्तीय सत्र के अंतिम तीन दिनों में विभागों में ट्रांसफर हुए 120 करोड़

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सांकेतिक तस्वीर
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देवरिया। वित्तीय सत्र के अंतिम दिन सरकारी दफ्तरों में बजट खपाने को लेकर दिन भर माथापच्ची होती रही। बिल-बाउचर दुरुस्त कर लंबित भुगतान कराए गए। अवशेष बजट को सरेंडर करने की कवायद भी देर शाम तक जारी रही। सत्र के अंतिम तीन दिनों में विभिन्न विभागों को 120 करोड़ रुपये से अधिक कोषागार से ट्रांसफर किए गए। यह राशि वेतन, एरियर, अनुदान सहित अन्य मदों से संबंधित थी। इसके अलावा करीब 30 करोड़ रुपये सरेंडर भी हुए है। हालांकि देर शाम तक कार्यालय में काम जारी रहा।
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वित्तीय सत्र का अंतिम दिन होने के कारण रविवार की छुट्टी में भी तमाम सरकारी दफ्तर खुले रहे। अंदर अफसर-कर्मचारी सत्र में आवंटित हुए बजट को खर्च करने के लिए माथापच्ची कर रहे थे। दस्तावेज लेकर वह कोषागार से दफ्तर तक भागदौड़ करते रहे। विकास भवन, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली निगम, कलेक्ट्रेट, कृषि जैसे प्रमुख विभागों में हलचल अधिक रही। व्यस्तता इतनी थी कि क्लर्कों ने अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर रखा था। कोषागार से अंतिम दिन 32 करोड़ रुपये कई विभागों में भेजा गया। वरिष्ठ कोषाधिकारी कुलदीप सरोज ने बताया कि क्लोजिंग के बारे में सभी विभागों को लगातार पत्राचार किया गया था। कुछ विभागों ने अंतिम तिथि से पहले ही बजट सरेंडर कर दिया था। शाम पांच बजे के बाद बिल का भुगतान नहीं किया गया। 
सात करोड़ का बिल पेश नहीं कर पाया माध्यमिक शिक्षा विभाग
देवरिया। समय से बजट खर्च करने वाले विभाग में सबसे अधिक धनराशि माध्यमिक शिक्षा विभाग की रही। यहां शिक्षकों के सातवें वेतन आयोग का एरियर सत्र के अंतिम दिनों में प्राप्त हुआ था। विभाग की ओर से महज डेढ़ करोड़ का ही बिल पेश किया जा सका। बची धनराशि का कोई ब्योरा उपलब्ध न होने से फिलहाल इसे सरेंडर की श्रेणी में डाल दिया गया। इसके अलावा स्वास्थ्य, विकास, कृषि सहित विभिन्न विभागों से कुल करीब 15 करोड़ रुपये सरेंडर होने का अनुमान लगाया जा रहा है। 
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इनसेट
बेसिक शिक्षा और पीडब्लूडी ने दिखाई तत्परता
देवरिया। बजट खर्च में पीछे छूटने वाला बेसिक शिक्षा और लोकनिर्माण विभाग ने इस वर्ष तत्परता दिखाई है। बेसिक शिक्षा विभाग के ड्रेस, मोजा, जूता और फर्नीचर समेेक कई मदों का करीब तीन करोड़ रुपये काफी दिनों से डंप पड़ा था, लेकिन सत्र खत्म होने से पूर्व आनन-फानन में इसे खर्च किया गया। बावजूद 1.38 करोड़ रुपये सरेंडर करना पड़ा।लोकनिर्माण विभाग का करीब डेढ़ लाख रुपये बचा था जो अंतिम दिन खर्च हुआ। 
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इनसेट
कलेक्ट्रेट से 33 लाख, पुलिस के 1.45 करोड़ रुपये सरेंडर
देवरिया। स्वास्थ्य, कृषि और पुलिस विभाग ने शासन से मिला हुआ बजट खर्च करने में उदासीनता बरती है, जबकि कलेक्ट्रेट ने सर्वाधिक अपने मद का बजट खर्च किया है। उप कृषि निदेशक कार्यालय का सात करोड़, सीएमओ कार्यालय नौ करोड़, जिला अस्पताल 1.30 करोड़, जिला अस्पताल महिला 75 लाख, जिला विद्यालय निरीक्षक 5.44 करोड़, वित्त एवं लेखाधिकारी माध्यमिक शिक्षा का 3.51 करोड़, कलेक्ट्रेट का 33 लाख, अधिशासी अभियंता सिंचाई खंड-दो का 45 लाख, पुलिस अधीक्षक का 1.45 करोड़ समेत कई विभाग का करीब 30 करोड़ रुपये बिल नहीं भेजने के कारण लैप्स हुआ है।
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इनसेट
शाम 5 बजे के बाद बिल लेकर पहुंचने वाले बैरंग लौटे
देवरिया। शाम 5 बजे कोषागार में बिल लेकर पहुंचने वाले अफसरों की एक नहीं सुनी गई। जिला युवा कल्याण अधिकारी, प्रोबेशन अधिकारी और पीआरडी विभाग के कर्मचारी बिल लेकर पहुंचे। कर्मचारियों ने कहा कि बजट आज ही आया है, इसलिए बिल लाने में विलंब हो गया। कोषागार अधिकारी ने समय खत्म होने का हवाला देकर लौटा दिया।

वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन तीन बार लगी क्लीयरिंग

देवरिया। वित्तीय वर्ष 2018-19 के अंतिम दिन भी शहर के कई बैंक खुले रहे। एसबीआई स्थित क्लीयरिंग हाउस तीन बार लगा। इसमें विभिन्न बैंकों से आए चेकों का आदान-प्रदान किया। हालांकि रविवार का दिन होने और वर्ष की समाप्ति होने से आम ग्राहकों के काम नहीं हुए। सोमवार को लेखाबंदी के चलते शहर के एटीएम कुछ देर तक प्रभावित रहने की उम्मीद है।  
एसबीआई राघवनगर शाखा पर हर दिन दिखने वाली रौनक रविवार को बैंक खुलने के बावजूद गायब रही। मुुख्य प्रबंधक ऋतेश सागर ने बताया कि रविवार को तीन बार क्लीयरिंग लगी। हालांकि क्लीयरिंग में आनेवाले विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधियों की संख्या कम रही। जो भी चेक आए, उनका निपटारा किया गया। उन्होंने बताया कि  सरकारी धन जमा करने के लिए जिलाधिकारी की ओर से शाखाएं खोलने का निर्देश था। पहली अप्रैल को लेखाबंदी का अवकाश होगा। अब दो अप्रैल से ही बैंक नियमित रुप से खुलेगा। पहली अप्रैल को मेन सर्वर को अपडेट किए जाने के चलते एटीएम सेवा कुछ देर के लिए काम नहीं करेगी। उधर लीड बैंक प्रबंधक बीएस मीणा के 30 मार्च को सेवानिवृत्ति के बाद के चार्ज संभाल रहे एवं सेंट्रल बैंक मुख्य शाखा के प्रबंधक राकेश रंजन ने बताया कि टैक्स जमा करने के लिए शाखा को खोला गया। रात आठ बजे के बाद ही काउंटर को बंद किया गया।
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