फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नियाज को घर वापसी पर मिला ‘हाथ’ का साथ

विज्ञापन
CHUNAV
विज्ञापन
देवरिया। लोकसभा चुनाव के लिए देवरिया सीट पर कांग्रेस ने भी पत्ते खोल दिए हैं। हाल ही में बसपा छोड़कर आए नियाज अहमद को पार्टी ने उम्मीदवार घोषित किया है। वर्ष 2014 में बसपा के सिंबल पर मैदान में उतरे नियाज अहमद ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत कांग्रेस से ही की थी। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में वह पथरदेवा सीट से कांग्रेस से उम्मीदवार बने थे, लेकिन ऐन वक्त पर प्रत्याशी बदले जाने से नाराज होकर उन्होंने पार्टी से नाता तोड़ बसपा का दामन थाम लिया था। अब फिर से घर वापसी पर उन्हें टिकट मिला है।
विज्ञापन

मुंबई में कारोबारी नियाज अहमद ने वर्ष 2014 में करीब 2.31 लाख वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे थे। इस बार भी वह टिकट के दावेदार माने जा रहे थे, लेकिन ऐन वक्त पर बसपा ने टिकट नहीं दिया। इससे नाराज नियाज बसपा से त्यागपत्र देकर फिर से कांग्रेस में शामिल हो गए। पार्टी सूत्रों की मानें तो कांग्रेस पहले इस सीट से राष्ट्रीय प्रवक्ता व रुद्रपुर के पूर्व विधायक अखिलेश प्रताप सिंह को उतारना चाह रही थी। नेतृत्व के निर्देश पर उन्होंने तैयारी भी शुरू कर दी थी।
हालांकि वह खुद मैदान में उतरने के मूड में नहीं थे। ऐसे में नियाज अहमद के रुप में विकल्प मिलते ही वह किनारे हो गए। मूल रुप से देसही देवरिया क्षेत्र के निवासी नियाज ने वर्ष 2009 में राजनीति की शुरुआत की। वर्ष 2010 में कांग्रेस की ओर से एमएलसी (स्थानीय निकाय क्षेत्र) का चुनाव लड़े। वर्ष 2012 में पथरदेवा सीट पर कांग्रेस ने उन्हें उम्मीदवार घोषित किया, लेकिन पर्चा दाखिला से पहले प्रत्याशी बदल दिया गया। करीब छह साल बाद घर वापसी पर पार्टी ने उन्हें टिकट दिया है। टिकट मिलने पर नियाज अहमद ने कहा कांग्रेस नेतृत्व ने टिकट देकर जो भरोसा जताया है, उस पर खरा उतरने की पूरी कोशिश रहेगी।
विज्ञापन



अब भाजपा के टिकट पर टिकी निगाह
देवरिया। लोकसभा चुनाव के लिए सदर सीट पर सपा-बसपा गठबंधन और कांग्रेस के उम्मीदवारों की तस्वीर लगभग साफ हो गई है। गठबंधन ने विनोद जायसवाल को लोकसभा क्षेत्र का प्रभारी नियुक्त किया है। पूरी दमदारी के साथ वह चुनाव मैदान में उतरकर प्रचार में जुट गए हैं। कांग्रेस ने भी नियाज अहमद को प्रत्याशी घोषित करते हुए चुनावी समर में उतार दिया है। प्रमुख विपक्षी दलों के उम्मीदवार तय होने के बाद अब सबकी निगाहें सत्ताधारी भाजपा की ओर टिकी हैं। पार्टी अपने वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र का किसको उत्तराधिकारी चुनती है, इसे जानने के लिए हर कोई बेचैन है। चट्टी-चौराहों सहित हर प्रमुख स्थलों पर भाजपा उम्मीदवार के नाम को लेकर ही चर्चा जारी हैं। आसपास की अन्य सीटों का उम्मीदवार घोषित होने के बाद भी देवरिया में नाम तय नहीं होने पर राजनीतिक हलके में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। पार्टी सूत्रों की मानें तो नेतृत्व तीन-चार नामों के बीच उलझा है। ऐसे सर्वमान्य चेहरे की तलाश की जा रही है, जिसके एलान के बाद कहीं किसी तरह के विरोध की नौबत न आए। टिकट चयन में वर्तमान सांसद कलराज मिश्र की राय को भी अहम मानी जा रही है। दो-तीन दिनों में टिकट तय होने के अनुमान जताए जा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें