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रोडवेज परिसर में यात्री सुविधाओं का टोटा

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देवरिया। प्रतिदिन 15 से 16 लाख रुपये की आय देने वाले परिवहन निगम का देवरिया डिपो पर यात्री सुविधाओं का टोटा है। डिपो के परिसर, शौचालय और मूत्रालय एवं यात्री विश्रामालय की गंदगी बाहर से आने वाले यात्रियों का मन खराब कर देती हैं। आलम यह है कि साफ पानी तक यहां मयस्सर नहीं है। यात्रियों की कौन कहे, रोडवेजकर्मी भी बोतलबंद पानी खरीद कर प्यास बुझाने को मजबूर हैं। जिम्मेदार अधिकारी कार्यालय में बैठ आय का गुणा-भाग करने में व्यस्त रहते हैं।
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देवरिया डिपो में निगम के 72 और अनुबंधित 103 बसों का संचालन वर्तमान में हो रहा है। यहां से दिल्ली, कानपुर, लखनऊ तक लंबी दूरी के मार्गों के अलावा लोकल रुटों पर रुद्रपुर, बरहज, भटनी, हेतिमपुर, हाटा, पकड़ी बाजार, बरांव, कपरवार, बारादीक्षित तक बसों का संचालन होता है। देवरिया से गोरखपुर, पडरौना, सलेमपुर, बलिया, दोहरीघाट डिपो के सर्वाधिक लोड फैक्टर वाले और आय देने वाले मार्ग है। डिपो से बसें प्रतिदिन 35 हजार से अधिक यात्रियों को ढोती हैं। जिनसे प्रतिदिन डिपो को 15 से 16 लाख रुपये की आमदनी हो रही है। इतनी आय के बावजूद परिसर में यात्री सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं है। स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए छह वर्ष पूर्व यात्री विश्रामालय के ऊपर लगाया गया आरओ प्लांट एक वर्ष बाद चलकर ही खराब पड़ा है। प्रतिमाह 5500 रुपये आगरा की एक एजेंसी को रोडवेज इसके लिए भुगतान करता है। लेकिन आज भी यात्रियों को साफ पानी के लिए परिसर में भटकना पड़ता है। इस बाबत सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक आरके उपाध्याय ने बताया कि परिसर और मूत्रालयों की सफाई व्यवस्था को ठेके पर दिया गया है। खराब आरओ प्लांट के लिए एजेंसी को पत्र भेजा गया है। बसों के अंदर सीटें गंदी ना रहे, इसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी। अनुबंधित बस मालिकों को भी बसों को स्वच्छ रखने की हिदायत दी गई है।

जर्जर है यात्री विश्रामालय
डिपो की बिल्डिंग वर्ष 1972 में बनी थी। भवन कई जगह से जर्जर हो चुका है। कई बार छतों से प्लास्टर उखड़कर गिर जाता है। जर्जर विश्रामालय में ही बैठकर यात्री बसों का इंतजार करते हैं। इसमें लगे छह सिलिंग फैन बिजली से नहीं हवा से डोलते हैं। इनमें से चार के कंडेंसर खराब हैं। दो का मोटर जल चुका है। गर्मी बढ़ने के बावजूद इस ओर किसी का ख्याल नहीं है।
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बसों में सीटों की गंदगी करती है परेशान
डिपो के बसों की सफाई व्यवस्था भगवान भरोसे हैं। निगम के बसों की सीटें इतनी गंदी है कि यात्री खुद सीट पर बैठने से पहले उसे पोछते हैं। अनुबंधित बस के मालिक भी सफाई का ख्याल नहीं करते। यात्रियों के शिकायत करने पर भी रोडवेज के अधिकारी और कर्मचारी इसे अनसुना कर देते हैं।
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