रुद्रपुर/रामलक्षन। नकटापार में सोमवार की रात हादसे से एक बुजुर्ग पिता के बुढ़ापे की लाठी और दो दिव्यांग भाइयों की वैशाखी टूट गई। खेत में टूटकर गिरे बिजली के तार के चपेट में आए भतीजे की जान बचाने को चाचा ने अपनी जान दे दी। उसका आठ साल का मासूम भतीजा मेडिकल कॉलेज में मौत से लड़ रहा है।
भतीजे को बचाने में जान गवां चुके 40 वर्षीय भोला यादव पर पूरे कुनबे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी थी। वह बुजुर्ग पिता के बुढ़ापे की लाठी और दो विकलांग भाइयों की वैशाखी थे। उनके चार मासूम बच्चों और बीबी का भविष्य अंधकार में डूब गया है। भोला परिवार का एक मात्र कमाने वाले सदस्य थे। पैर से विकलांग दोनों भाइयों को उसने कभी विकलांग होने का अहसास नहीं होने दिया। सोमवार की रात नियति के क्रूर खेल ने भोला के हंसते-खेलते कुनबे का खेल बिगाड़ दिया। उसके घर के सामने खेत में बिजली का तार टूट कर गिरा था। दरवाजे पर खेल रहा भतीजा सन्नी खेत में चला गया। वह तार की चपेट में आ गया। भतीजे को छटपटाता देख भोला दौड़कर उसे तार से छुड़ाने गया। वह उसे छुड़ाने में कामयाब तो हो गया लेकिन खुद करंट से बुरी तरह घायल हो गया। गांव के लोग दोनों को आनन-फानन में जिला अस्पताल ले गए। अस्पताल पहुंचकर भोला ने दम तोड़ दिया। डाक्टरों ने भतीजे सन्नी को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। मेडिकल कॉलेज में उसकी हालत चिंताजनक है। इधर गांव में उसके परिवार में कोहराम मचा है। दो दिव्यांग भाई बब्बन यादव और शैलेद्र, पत्नी देवंती देेवी, पिता रामप्यारे और चार मासूम बच्चों की हृदयविदारक चीख से पूरा मंजर गमगीन है।
बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप
रुद्रपुर। नकटापार की घटना के पीछे बिजली विभाग का हाथ बताया जा रहा है। दो दिन से टूटे बिजली के तार को यदि बिजली विभाग जोड़ दिया होता तो शायद रामप्यारे का कुनबा तबाह नहीं हुआ होता। परिवार के लोगों ने बताया कि बिजली विभाग को सूचना देने के बाद भी टूटे तार में करंट प्रवाहित होता रहा। गांव वालों ने हादसे जिम्मेदार विभाग के अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई की मांग की।