गोरखपुर/देवरिया। चकबंदी से बची जमीनों पर फर्जी परवाना आदेश (नामांतरण) से नाम दर्ज कराने का खेल काफी पुराना है। वर्ष 2018 में यह मामला पहली बार गोरखपुर के चकरा अव्वल गांव में सामने आया था।
इसके बाद कुशीनगर, देवरिया और महराजगंज में भी इस तरह के खुलासे होने लगे हैं। देवरिया जिले के रुद्रपुर क्षेत्र में पकड़े गए 11 मामलों में भी फर्जी आदेश की पुष्टि हुई है। इसकी रिपोर्ट देवरिया जिला प्रशासन को भेजी गई है। वहीं कुशीनगर में भी एक और फर्जी आदेश का मामला सामने आया है।
राजस्व विभाग से जुड़े सूत्रों ने बताया कि गोरखपुर के एआरओ कार्यालय में गोरखपुर के अलावा कुशीनगर, देवरिया, महराजगंज और मऊ जिले के प्रकरण भी थे। वर्ष 2018 में गोरखपुर के चकरा अव्वल गांव के एक काश्तकार ने तहसील दिवस में प्रार्थना पत्र देकर एक जमीन का नामांतरण अपने नाम कराने का अनुरोध किया।
डीएम ने जांच के निर्देश दिए तो पता लगा कि एआरओ कार्यालय की बजाय यह फर्जी आदेश है।
इसी तरह देवरिया जिले में कुछ दिन पहले तहसील दिवस में एक व्यक्ति फर्जी परवाना आदेश लेकर पहुंचा और बंदोबस्त में नामांतरण के लिए प्रार्थना पत्र दिया।
डीएम के निर्देश पर तहसील प्रशासन ने इस तरह के अन्य प्रार्थना पत्रों को एकत्रित किया। इसके बाद 11 नामों की एक सूची एआरओ कार्यालय को भेजी गई। एआरओ कार्यालय में जांच में पाया गया कि ये सभी आदेश क्षेत्राधिकारी से बाहर के हैं।
मतलब ये पत्रावलियां अब गोरखपुर में नहीं हैं, फिर भी इनसे संबंधित आदेश निर्गत हो गए हैं। एआरओ कार्यालय की तरफ से इन आदेश के फर्जी होने का पत्र देवरिया जिला प्रशासन को भेज दिया गया है।
इसके अलावा कुशीनगर के खड्डा तहसील का एक और आदेश फर्जी होने की बात सामने आई है। बता दें कि फर्जी आदेश में एक पूर्व कर्मचारी के कारगुजारी की खूब चर्चा हो रही है।
कुशीनगर के फर्जीवाड़ा का मास्टरमाइंड रहता है महराजगंज में गोरखपुर। खड्डा तहसील के गांव बसंतपुर, शिवपुर और मरिचहवा में जमीनों के फर्जी परवाना से नामांतरण कराने वाला मास्टर माइंड इसी जिले के पडरौना तहसील क्षेत्र का रहने वाला था। उसने पहले पडरौना तहसील में राजस्व कानून के दांव पेच सीखे और फिर अपने एक और साझेदार के साथ मिलकर नामांतरण का खेल शुरू कर दिया।