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सेना में अफसर होता समीर, कैसे बना खूंखार अपराधी

Wed, 06 Aug 2014 10:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अलीगढ़
ग्वालियर में पुलिस एनकाउंटर में मारा गया एमपी व यूपी में मोस्ट वांटेड बना समीर जाट का असली नाम अरुण चौधरी था। यह नगरा पतेला थाना इगलास जिला अलीगढ़ का निवासी था और इसके पिताजी महाराणा प्रताप सिंह चौधरी (यूपी पुलिस में उपनिरीक्षक) थे।


पुलिस डायरी के अनुसार वर्ष 2004 में इसने अलीगढ़ कॉलेज में पढ़ने वाले अपने एक साथी प्रणव की हत्या कर अपराध की दुनिया में कदम रखा था। इसके बाद इसने अपने कुछ साथियों को ग्वालियर के ही एक कुख्यात बदमाश रमन तिवारी की हत्या की वारदात में सहयोग दिया था। समीर जाट बीएससी द्वितीय वर्ष तक शिक्षित था।

एनडीए में चयनित हो गया था समीर
जिले के कस्बा इगलास के गांव फतेला निवासी समीर उर्फ अरुण उर्फ अजय चौधरी नेशनल डिफेंस एकेडमी में चयनित हो गया था लेकिन अपने पुलिस इंस्पेक्टर पिता की हत्या के बाद जरायम की दुनिया में कूद गया। समीर उत्तर प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा में सक्रिय रहा है।


पिता की गाजियाबाद में, चाचा-ताऊ की गांव में हत्या
समीर के पिता की गाजियाबाद में एक झगड़े के दौरान हत्या कर दी गई थी, जबकि इसके ताऊ निरोत्तम सिंह व चाचा हरवंश सिंह की भी हत्या गांव में रंजिश के चलते कर दी गई थी। समीर का भाई तरुण दिल्ली पुलिस में तैनात है और बहन पम्मी यूपी पुलिस में सब इंस्पेक्टर है। इनके अलावा एक बहन रेनू भी है। इन तीनों ने भी गांव से संबंध तोड़ दिया है। परिजनों ने बताया कि दोनों कहां रहते हैं। इस संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। चर्चा यह है कि तीनों भाई बहनों ने समीर की आपराधिक गतिविधियों के कारण समीर और गांव से संपर्क तोड़ दिया है।

अब नहीं समीर की गांव में संपत्ति
समीर की ताई ने बताया कि जब वह दस वर्ष का था उसी समय अपने पिता के साथ पढ़ाई के लिए यहां से परिवार के साथ गाजियाबाद चला गया। कभी कभार यहां घंटे दो घंटे के लिए आया होगा। एक बार ग्वालियर जेल से जमानत पर आने के बाद समीर दो दिन अपने गांव नगला फतेला रुका था, इसके बाद कभी रात को नहीं रुका। समीर के पिता चार भाई थे। संपत्ति के बंटवारे में गांव में जो दो मकान थे उनमें से एक ताऊ व एक चाचा के हिस्से में आया। समीर का एक मकान इगलास नगर में भी गोंडा रोड पर है, जिसमें ताला पड़ा रहता है, कोई भी यहां नहीं रहता। समीर ने अपने हिस्से का खेत तीन जुलाई को यहां सब रजिस्ट्रार कार्यालय में आकर अपनी ताई को बेच दिया था।

शूटर समीर जाट पुलिस मुठभेड़ में धराशायी

उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में मोस्ट वांटेड शॉर्प शूटर समीर जाट को मंगलवार तड़के ग्वालियर पुलिस ने एनकाउंटर में धराशायी कर दिया। समीर जाट अपने एक साथी के साथ आगरा से ग्वालियर आकर झांसी जाने की फिराक में था, तभी पुलिस ने उसे घेर लिया।

कुख्यात गैंगस्टर समीर जाट के आज तड़के आगरा की तरफ से ग्वालियर की ओर आने की सूचना पर पुलिस हाईवे पर चेकिंग शुरू कर दी। उसी दौरान काले रंग की पेशन बाइक नंबर यूपी85 डब्लू 1232 से अपने साथी संग समीर आता दिखायी दिया। पुलिस को देख उसने बानमोर के पास रांग साइड में बाइक मोड़कर भागने लगे।  पुलिस ने पीछा किया तो उसने पहाड़ी पर चढ़कर पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की। इसमें कुख्यात समीर जाट मारा गया। जबकि उसका साथी मौके से फरार होने में कामयाब रहा। पुलिस के अनुसार समीर जाट के पीठ और कनपटी में लगी है। कुख्यात के पास से एक पिस्टल, एक मैग्जीन (10 राउंड क्षमता), दो महिलाओं के फोटो, एक टेलीफोन डायरेक्टरी, चार रिचार्ज वाउचर व कई सिम भी मिली हैं।

ग्वालियर के एसएसपी संतोष कुमार सिंह ने बताया कि समीर जाट वर्तमान में अपराध जगत का बदमाश बनने की फिराक में था, वह महंगे जूते पहनने का शौकीन था। गौरतलब है कि समीर जाट बीती 31 जुलाई को अलीगढ़ कचहरी में पेशी के दौरान पुलिस कर्मियों पर हमला कर भाग निकला था, तभी से अलीगढ़, आगरा और ग्वालियर की पुलिस टीमें उसे तलाश रही थी।

समीर जाट के नाम दर्ज थे कई अपराध

आतंक के पर्याय बने समीर जाट के नाम शहर के विभिन्न थानों में कई अपराध पंजीबद्ध थे। समीर जाट के ऊपर एमपी व यूपी कई थानों में हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, लूट सहित दो दर्जन से भी अधिक मामले दर्ज थे। समीर जाट ने बीते दिनों दतिया के एक व्यापारी नरेश शर्मा के पुत्र का अपहरण कर एक करोड़ रुपये की फिरौती भी वसूली थी। एसएसपी संतोष कुमार सिंह के अनुसार समीर जाट को सुपारी किलर के रुप में जाना जाता है, वह ज्यादातर अपराध सुपारी लेकर करता था। बीते दिनों इसने अलीगढ़ में एक वकील के पुत्र की हत्या कर उसकी कार भी लूट ली थी। इस मामले में इलाहाबाद कोर्ट से इसे आजीवन कारावास की सजा भी हुई थी।

डायरी खंगालेगी पुलिस
ग्वालियर पुलिस समीर जाट के पास से मिली डायरी को खंगाल रही हैं। इस डायरी में कई नेता, प्रापर्टी डीलर,  पुलिस और कुछ महिलाओं के भी नंबर हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार डायरी कब्जे में लेकर एसएसपी ने क्राइम टीम को इसके अध्ययन में लगाया है, ताकि इसके मददगारों तक पहुंचा जा सकें।

समीर के पैतृक गांव में छाया मातम
कुख्यात समीर जाट के पुलिस एनकाउंटर में मारे जाने की खबर सुबह ही उसके पैतृक गांव नगला फतेला पहुंच गई थी। जैसे ही यह खबर पहुंची परिवार में मातम छा गया। समीर की मां, भाई, बहन गांव में नहीं रहते, मगर चाचा-ताऊ के परिवारों में सन्नाटा सा पसर गया। लोग भी उनके दरवाजों पर जुटने लगे। इस दौरान समीर के परिजनों के विषय में कोई कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हुआ।

गांव नगला फतेला निवासी समीर उर्फ अरुण पुत्र महाराणा प्रताप सिंह की मौत के संबंध में जब ‘अमर उजाला’ प्रतिनिधि ने परिजनों से जानकारी की तो वे कुछ भी बोलने से कतरा रहे थे। समीर की ताई विमलेश व चाची विरमा देवी से बात की तो उन्होंने बताया कि उनका पिछले दस वर्ष से समीर से कोई वास्ता नहीं है। परिवार का होने के कारण शोक जरूर है।
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पूरी हुई समीर की अंतिम इच्छा...दुश्मनों से ‘बच गया’

ग्वालियर पुलिस की एके 47 रायफल और 9 एमएम पिस्टलों से गरजी गोलियों का शिकार हुए कुख्यात गैंगेस्टर समीर जाट की अंतिम इच्छा जरूर पूरी हो गई। वह चाहता था कि कभी दुश्मनों के हाथ न आए। बेशक जहर खाकर मरना पड़े। उसने अपनी यह इच्छा प्रेमिका शोभा को भेजी चिट्ठी में जाहिर की थी, जो फरारी के दौरान पुलिस को बरामद हुई।

चिट्ठी में समीर द्वारा लिखे गए शब्दों पर गौर करें तो उसने शोभा को बताया कि वह ग्वालियर से जुड़े मुकदमों में पेशी पर महज इसलिए नहीं जाता है कि वहां उसके साथी इस समय जेलों में हैं और दुश्मन बाहर छुट्टा घूम रहे हैं। इसलिए उसे खतरा है कि कहीं पेशी के दौरान या अलीगढ़ से ग्वालियर के रास्ते में निशाना न बना लें। दूसरी बात उसकी यह थी कि पत्नी ने भी डेढ़ माह पहले उसके साथ धोखा किया है।

वह जमीन के बैनामे का 15 लाख रुपया लेकर गायब हो गई और उसने दुश्मनों से हाथ मिला लिया। पत्नी भी दुश्मनों को उसकी मुखबिरी कर सकती है और इसके बदले दुश्मनों से रकम ऐंठ सकती है। इसलिए वह ग्वालियर पेशी पर जाने से कतरा रहा है। दुश्मनों के हाथों मौत से बेहतर है कि जहर खाकर जान दे दी जाए। मंगलवार को एनकाउंटर में समीर के मारे जाने के बाद उस चिट्ठी को पढ़ने वाले पुलिसकर्मी यही कह रहे थे कि चलो समीर की अंतिम इच्छा पूरी हुई। वह दुश्मनों से बच गया और पुलिस के हाथों मारा गया।

पत्नी के प्रति मन में था आक्रोश, इसलिए भागा
वर्ष 2012 में गिरफ्तारी से करीब दो माह पहले ग्वालियर की रहने वाली मेघा नाम की युवती से प्रेम विवाह करने वाले समीर को ऐसा विश्वास न था कि उसकी पत्नी इस तरह का धोखा करेगी। जेल में अक्सर गुमशुम रहने वाला समीर अपने कुछ खास दोस्तों से जब भी पत्नी के विषय में चर्चा करता था तो उसके प्रति बेहद गुस्सा भरा हुआ था। वह पत्नी और उन दुश्मनों को ठिकाने लगाना चाहता था। इसीलिए वह अलीगढ़ से भागा और ग्वालियर का रुख अपनाया था। उसकी मंशा थी कि पत्नी और दुश्मनों को ठिकाने लगाने के बाद फिर आगे के विषय में सोचा जाएगा।
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