ग्वालियर में पुलिस एनकाउंटर में मारा गया एमपी व यूपी में मोस्ट वांटेड बना समीर जाट का असली नाम अरुण चौधरी था। यह नगरा पतेला थाना इगलास जिला अलीगढ़ का निवासी था और इसके पिताजी महाराणा प्रताप सिंह चौधरी (यूपी पुलिस में उपनिरीक्षक) थे।
पुलिस डायरी के अनुसार वर्ष 2004 में इसने अलीगढ़ कॉलेज में पढ़ने वाले अपने एक साथी प्रणव की हत्या कर अपराध की दुनिया में कदम रखा था। इसके बाद इसने अपने कुछ साथियों को ग्वालियर के ही एक कुख्यात बदमाश रमन तिवारी की हत्या की वारदात में सहयोग दिया था। समीर जाट बीएससी द्वितीय वर्ष तक शिक्षित था।
एनडीए में चयनित हो गया था समीर
जिले के कस्बा इगलास के गांव फतेला निवासी समीर उर्फ अरुण उर्फ अजय चौधरी नेशनल डिफेंस एकेडमी में चयनित हो गया था लेकिन अपने पुलिस इंस्पेक्टर पिता की हत्या के बाद जरायम की दुनिया में कूद गया। समीर उत्तर प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा में सक्रिय रहा है।
पिता की गाजियाबाद में, चाचा-ताऊ की गांव में हत्या
समीर के पिता की गाजियाबाद में एक झगड़े के दौरान हत्या कर दी गई थी, जबकि इसके ताऊ निरोत्तम सिंह व चाचा हरवंश सिंह की भी हत्या गांव में रंजिश के चलते कर दी गई थी। समीर का भाई तरुण दिल्ली पुलिस में तैनात है और बहन पम्मी यूपी पुलिस में सब इंस्पेक्टर है। इनके अलावा एक बहन रेनू भी है। इन तीनों ने भी गांव से संबंध तोड़ दिया है। परिजनों ने बताया कि दोनों कहां रहते हैं। इस संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। चर्चा यह है कि तीनों भाई बहनों ने समीर की आपराधिक गतिविधियों के कारण समीर और गांव से संपर्क तोड़ दिया है।
अब नहीं समीर की गांव में संपत्ति
समीर की ताई ने बताया कि जब वह दस वर्ष का था उसी समय अपने पिता के साथ पढ़ाई के लिए यहां से परिवार के साथ गाजियाबाद चला गया। कभी कभार यहां घंटे दो घंटे के लिए आया होगा। एक बार ग्वालियर जेल से जमानत पर आने के बाद समीर दो दिन अपने गांव नगला फतेला रुका था, इसके बाद कभी रात को नहीं रुका। समीर के पिता चार भाई थे। संपत्ति के बंटवारे में गांव में जो दो मकान थे उनमें से एक ताऊ व एक चाचा के हिस्से में आया। समीर का एक मकान इगलास नगर में भी गोंडा रोड पर है, जिसमें ताला पड़ा रहता है, कोई भी यहां नहीं रहता। समीर ने अपने हिस्से का खेत तीन जुलाई को यहां सब रजिस्ट्रार कार्यालय में आकर अपनी ताई को बेच दिया था।