बागपत जिले के बदरखा गांव में गांव छोड़ने के पंचायत के फरमान पर सहमे प्रेमी युगल ने रविवार सुबह सूरज निकलते ही भारी मन से गांव छोड़ दिया।
दोनों को डर था कि अगर पंचों की नहीं मानी तो जान से हाथ धोना पड़ सकता है लेकिन खुद को गांव का लंबरदार बताने वाले पंच अभी भी नहीं माने हैं। अब इन्होंने युवक के परिवार को गांव से निकालने की जिद पकड़ ली है। इसकी शिकायत पुलिस से की गई है।
पंचायती फरमान: 'गांव छोड़ दो नहीं तो मिलेगी मौत'
पंचायत ने शनिवार शाम दो फरमान सुनाए थे। पहला, प्रेमी युगल गांव छोड़कर चला जाए, वरना दुनिया छोड़ने के लिए तैयार रहे। दूसरा, लड़की भगाकर ले जाने के आरोपी युवक के परिवार को भी तीन दिन के भीतर गांव छोड़ना होगा, वरना उनकी जान को भी खतरा है। इस फरमान पर रातभर गांव में तनाव का माहौल बना रहा।
रविवार सुबह प्रेमी युगल सूरज निकलते ही गांव छोड़ने के लिए तैयार हो गया। लड़के के परिवार ने उन्हें रोकना भी चाहा लेकिन दोनों बोले कि जब जान ही नहीं रहेगी, तो गांव में कैसे रहेंगे। दोनों चुपचाप गांव छोड़कर चले गए।
उधर, पंचों ने लड़के के परिवार पर भी गांव से निकलने का दबाव बनाया। इस पर लड़के के माता-पिता थाने पहुंच गए। उन्होंने पंचों के खिलाफ नामजद तहरीर दे दी। इसमें बताया गया है कि उन्हें तीन दिन में गांव छोड़ने का फरमान दिया गया है। यह भी कहा गया है कि ऐसा न करने पर उनकी जान को खतरा है।
क्या है मामला
बदरखा गांव से पांच दिन पहले कश्यप बिरादरी की एक विवाहिता लापता हो गई थी। बाद में पता चला कि उसे गांव के ही जाट बिरादरी का एक अविवाहित युवक भगा ले गया है।
पुलिस ने शनिवार को विवाहिता को पकड़कर उसके ससुरालवालों को सौंप दिया। विवाहिता ने ऐलान कर दिया कि वह अपने प्रेमी युवक के साथ ही रहेगी। इसके बाद पंचायत ने प्रेमी युगल को गांव छोड़ने का फरमान सुनाया।