सिरदर्द होने पर ठंडा तेल लगाने वालों को थोड़ी देर के लिए भले ही राहत मिल जाती है, लेकिन यह दिमाग के लिए नुकसानदेह है। ठंडा तेल में मिला कपूर मस्तिष्क की नसों में गलन पैदा करता है। तेल में कपूर की मात्रा जितनी ज्यादा होगी, वह उतना ही नुकसान करेगा।
यह निष्कर्ष बीएचयू के न्यूरो चिकित्सकों ने एक शोध में निकाला है।
गत जनवरी से अप्रैल माह तक बीएचयू में सिरदर्द का उपचार कराने आईं पूर्वांचल के विभिन्न जिलों की 78 महिलाओं का न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. वीएन मिश्रा की टीम ने ब्योरा तैयार किया।
इसमें यह बात सामने आई कि ये सभी महिलाएं सिरदर्द से राहत पाने के लिए बाजार में मिलने वाला कोई न कोई ठंडा तेल इस्तेमाल करती थीं। इन महिलाओं को शुरू में दर्द निवारक दवाएं दी गईं, लेकिन कोई खास फर्क नहीं पड़ा।
तब पीडि़त महिलाओं का सीटी स्कैन कराया गया। इसकी रिपोर्ट से पता चला कि इन महिलाओं के मस्तिष्क की नसों में तेजी से गलन शुरू हो गई थी। इसके बाद बाजार में मिलने वाले दो अलग-अलग ब्रांड के ठंडे तेल के नमूने का प्रयोगशाला में विश्लेषण किया गया।
इसमें एक नमूने में प्रति सौ मिलीलीटर तेल में .546 ग्राम तथा दूसरे में .5 ग्राम कपूर पाया गया। इन नमूनों में मेंथाल होने की भी पुष्टि हुई। अब यह पता लगाने के लिए शोध चल रहा है कि ठंडे तेल में कपूर की अधिकतम कितनी मात्रा दिमाग सहन कर सकता है।
कपूर दिमाग की नसों में गलन पैदा करता है, जिससे मांसपेशियों में दर्द होता है। बाद में यह मस्तिष्क की कई बीमारियों का कारण बन जाता है। कपूर के हानिकारक प्रभाव का जिक्र काफी पहले 'अमेरिकी जर्नल ऑफ टॉक्सिकोलॉजी में किया जा चुका है। जिस तेल में कपूर की जितनी मात्रा होगी वह दिमाग की नसों के लिए उतना ही नुकसानदेह होगा।
- डॉ. वीएन मिश्रा, न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष, बीएचयू