लखनऊ में विभिन्न स्कूलों या हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं से देह व्यापार कराया जाता था। पूछताछ में ये कबूला लखनऊ में पकड़े गए हाईप्रोफाइल सेक्स रैकेट के तीन दलालों ने।
इनमें से एक खुद को एसटीएफ का दरोगा बताता था। उसके कब्जे से पुलिस वर्दी की पैंट, चार स्टार व ब्लू फिल्मों की सीडी बरामद हुई हैं। मसाज पार्लर के नाम पर देह व्यापार करने वाले गिरोह से जुड़े इन दलालों ने एक वेबसाइट का राज उजागर किया। इस वेबसाइट से कॉलगर्ल की बुकिंग की जाती है।
एसएसपी जे रविंदर गौड ने बताया कि पकड़े गए दलालों में राशिद अली खुद को एसटीएफ का दरोगा बताकर देह व्यापार में लाई गई लड़कियों को रौब में लेने के साथ उन्हें सुरक्षा का यकीन दिलाता था। शैलेश व विनय कश्यप विभिन्न स्कूलों या हॉस्टल में रहने वाली उन छात्राओं को जाल में फंसाते थे, जो अन्य जिलों से पढ़ने आईं और चकाचौंध से प्रभावित थीं। इसके अलावा प्राइवेट नौकरी की इच्छा रखने वाली युवतियों को पार्टटाइम जॉब व एक दिन में दो से दस हजार तक की कमाई का लालच देकर देह व्यापार कराते थे।
लग्जरी गाड़ियों में सैर के बहाने बुकिंग
हत्थे चढ़े दलालों ने कबूला कि सजी संवरी युवतियों को लग्जरी गाड़ी में बैठाकर सैर करने निकलते थे। इस दौरान ग्राहकों को फोन करके निर्धारित स्थान पर बुलाते। वह गाड़ी में बैठी युवती को पसंद करता। इशारा मिलने पर युवती कोल्डड्रिंक या कुछ अन्य वस्तु लेने के बहाने गाड़ी से उतरती। उसकी चाल व कद काठी के हिसाब से रेट तय होता। इसके बाद ग्राहक के साथ या उसके बताए पते पर युवती को भेजा जाता।
गाड़ियों के नाम के साथ स्टाफ व फाइल भी कोडवर्ड
कॉलगर्ल की बुकिंग के लिए ग्राहक व दलाल के बीच कोडवर्ड में बातचीत होती थी। मसलन, हमारा स्टाफ बहुत अच्छा है या स्टाफ लद्दड़ है। फाइल तैयार है। मैं भेज दूं या आप ले जाएंगे। नई मर्सडीज बहुत ही मस्त है। सेंट्रो भेज दूं। माइलेज अच्छा है। कम खर्च में काम चल जाएगा।
गर्लफ्रेंड्स की मदद से बनाई लंबी चेन
एसएसपी ने बताया कि तीनों दलालों ने पहले कुछ युवतियों से दोस्ती बनाई। उन्हें प्रेमजाल में फंसाया। प्रलोभन या नशा देकर उनकी बुकिंग की। इसके बाद उन पर सहेलियों को देह व्यापार में उतारने के लिए दबाव बनाया। एक सहेली से दूसरी और दूसरी से तीसरी को सेक्स रैकेट से जोड़कर लंबी चेन बना डाली। ग्राहक से मिली रकम का 50 फीसदी कॉलगर्ल को देते थे, जबकि आधी रकम से दलाल अपना खर्च, गाड़ी व घूमने-फिरने में खर्च करते थे।
परिवार की सहमति से चला रहे थे धंधा
एसओजी प्रभारी नागेंद्र चौबे ने बताया कि विनय कश्यप के पिता की मौत हो चुकी है। उसकी मां को बेटे के धंधे की जानकारी थी। इसी तरह राशिद का परिवार देह व्यापार में सहयोग कर रहा था। राजस्थान के मूल निवासी शैलेश कुमार सिंह का देहरादून में भी ठिकाना है। उसके क्रियाकलापों की परिवार को जानकारी थी।