शहीद सीओ जियाउल हक के परिवार में विश्वास का संकट पैदा हो गया है। जिया के पिता शमशुल हक ने बहू परवीन को मिलने वाली सभी आर्थिक मदद में से आधा हिस्सा मांगा है। शमशुल के मुताबिक सभी जगहों से मिली मदद की रकम पर पहला पहला हक मेरा है, परवीन का बाद में, क्योंकि मैं जियाउल हक का पिता हूं।
बृहस्पतिवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान शमशुल हक ने कहा कि मेरी बहू परवीन परिवार के बारे में नहीं सोच रही हैं। वह विभिन्न माध्यमों से मिलने वाली मदद की रकम को खुद रख रही हैं। जबकि उस पर पहला हक मेरा है। उन्होंने कहा-‘मैंने जियाउल को पाल-पोसकर बड़ा किया। वह मेरा बेटा था।
उन्होंने कहा ‘परवीन ने पूरे परिवार को मीडिया से बातचीत करने को मना कर रखा था। उन्होंने कहा था कि मीडिया से कोई बातचीत नहीं करनी है, क्योंकि इससे काम बिगड़ सकता है। इसलिए मैं अब तक चुप रहा। लेकिन अब मजबूर होकर मैं अपनी बात मीडिया के सामने रख रहा हूं। ताकि मुझे न्याय मिल सके।’
जियाउल हक के पिता शमशुल हक ने पूरे घटनाक्रम में पहली बार अपनी राय दी है। इस संबंध में जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद का पक्ष लेने के लिए उनके फोन पर संपर्क किया गया तो फोन उनकी बड़ी बहन नसरीन ने रिसीव किया। बताया कि बड़ी मुश्किल से अभी परवीन को सुलाया गया है। इस समय उनसे बात करवा पाना संभव नहीं है।