चित्रकूट। कानून व्यवस्था, विकास प्राथमिकता कार्यक्रम, नीति आयोग के बिंदुओं, वार्षिक जिला योजना व विभिन्न बिंदुओं की समीक्षा बैठक गुरुवार को कलक्ट्रेट सभागार में हुई। जनपद के प्रभारी मंत्री नंदगोपाल गुप्ता (नंदी) की अध्यक्षता में जिले भर में 18170 लाख रुपये के कार्य प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। जिला योजना वर्ष 2021-22 की संरचना की बैठक में कृषि विभाग 41 लाख, पशु विभाग 3315 लाख, ग्राम्य विकास 1620 लाख, खादी ग्राम उद्योग 50 हजार, अतिरिक्त ऊर्जा 7.10 लाख, रेशम 5 लाख, सड़क एवं पुल में 550 लाख, पर्यावरण में 2 लाख आदि विभिन्न विभागों का कुल परिव्यय 18170 लाख रुपये के प्रस्तावों का प्रभारी मंत्री सहित समिति के सदस्यों ने अनुमोदित किया।
उन्होंने कहा कि पीएम और सीएम निरंतर बुंदेलखंड के विकास के लिए काम कर रहे हैं। हाल ही में बुंदेलखंड के जिलों के दौरे में करोड़ों रुपये की परियोजनाएं शुरू हुई है।गोशालाओं में समस्या हुई तो कार्रवाई तय। साथ ही खनिज और भू माफियाओं पर लगाम कसें। परिषदीय विद्यालयों में कायाकल्प योजना अंतर्गत पूरे मानक पूरे न मिलने पर संबधित अधिकारी को तलब करें। कहा कि कन्या सुमंगला योजना मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में है। इसमें लक्ष्य के अनुरूप प्रगति कम है। डीएम से कहा कि संबंधित विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए। एक जनपद एक उत्पाद तथा मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के जो आवेदन पत्र लंबित है उन्हें तत्काल निस्तारित कराएं। एसपी से कहा कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को देखते हुए संबंधित पुलिस अधिकारियों को क्षेत्र में भ्रमण कराकर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाएं। महिला उत्पीड़न के मामलों में तत्काल निस्तारण कराएं। बैठक में राज्यमंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय, संासद आरके सिंह पटेल, मानिकपुर विधायक आनंद शुक्ला, डीएम शुभ्रांत कुमार शुक्ला, एसपी अंकित मित्तल आदि मौजूद रहे।
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सूची बनाकर आवास दिलाया जाएं
विधायक मानिकपुर ने मऊ व बरगढ़ पेयजल योजना के संचालन में कहा कि जो गांव व मजरे छूट गए हैं उसकी तत्काल सूची बनाकर हर घर नल योजना में शामिल कराया जाए। जिन कोल समुदाय के परिवारों को चिन्हित किया गया है उनकी सूची बनाकर आवास दिलाया जाए। सांसद ने कहा कि रुकमा खुर्द में बने बिजली पावर हाउस को अभी तक चालू नहीं कराया जा सका। वन विभाग की ओर से एनओसी नहीं दी गई। इस पर प्रभारी मंत्री ने प्रभागीय वनाधिकारी को निर्देश दिए कि सन 1980 की पूर्व की सड़कें जो है उसमें एनओसी की जरूरत नहीं है। इसका अपने विभाग से शासनादेश लेकर देखें। इस योजना पर आपत्ति न लगाई जाएं।