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Chitrakoot News: बिजली चोरी के आरोप से महिला बरी, बकाया जमा किया

Tue, 28 Apr 2026 12:28 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
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चित्रकूट। विशेष न्यायाधीश राम मणि पाठक की अदालत ने सुमन देवी को बिजली चोरी के आरोप से दोषमुक्त कर दिया। यह फैसला भारतीय विद्युत अधिनियम की धारा 152 के तहत दिया गया। इसमें अपराध का शमन करने और बकाया बिल जमा करने को आधार बनाया गया।
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सुमन देवी पर वर्ष 2015 में बिजली चोरी का आरोप था। उन पर 81,626 रुपये के बकाया पर विच्छेदित कनेक्शन को अवैध रूप से जोड़ने का आरोप था। विद्युत विभाग के अवर अभियंता सुनील कुमार पटेल ने 28 दिसंबर 2015 को उन्हें अवैध रूप से बिजली का इस्तेमाल करते पाया। उनका कनेक्शन 5 नवंबर 2015 को बकाया के कारण काटा गया था। इस मामले में कोतवाली कर्वी थाने में भारतीय विद्युत अधिनियम की धारा 138(बी) के तहत प्राथमिकी दर्ज हुई। तत्कालीन दरोगा शरद चंद्र पटेल ने आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। बचाव पक्ष ने सुनवाई के दौरान आरोपी को निर्दोष बताया।



दोषमुक्ति का आधार

सुमन देवी ने 28 जनवरी 2025 को 4 हजार रुपये का शमन शुल्क जमा किया। विद्युत विभाग ने भी कोई बकाया शेष न होने की पुष्टि की। न्यायाधीश राम मणि पाठक ने पाया कि आरोपी ने धारा 152 के प्रावधानों के तहत अपराध का शमन कर लिया। इस आधार पर, धारा 152(3) के तहत अपराध का समाधान किया गया। आरोपी को आरोपों से बरी कर दिया गया और जमानतनामे निरस्त हुए।
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परिवादी के अनुपस्थिति व साक्ष्य के अभाव में परिवाद खारिज



चित्रकूट। सिविल जज अश्विनी कुमार उपाध्याय ने राजाबेटी के लंबित परिवाद को खारिज कर दिया है। यह कार्रवाई परिवादी की लगातार अनुपस्थिति और साक्ष्य के अभाव में की गई।



यह परिवाद वर्ष 2024 से न्यायालय में लंबित था। बार-बार आदेश के बावजूद परिवादी न तो उपस्थित हुआ और न ही उसने पैरवी की। उसे 10 दिसंबर, 2025 को अंतिम अवसर दिया गया था, फिर भी वह अनुपस्थित रहा। न्यायालय ने परिवादी की अनुपस्थिति को मामले में उसकी अरुचि का संकेत माना। न्यायालय ने पेप्सी फूड्स लिमिटेड मामले का हवाला देते हुए कहा कि दंड प्रक्रिया का उद्देश्य न्यायोचित अभियोजन है, न कि किसी को परेशान करना। इसलिए अनुपस्थिति और साक्ष्य के अभाव में धारा 203 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत परिवाद खारिज कर दिया गया।



इसी तरह विद्यासागर का परिवाद भी खारिज किया गया। यह परिवाद सिविल जज अश्विनी कुमार उपाध्याय की कोर्ट में वर्ष 2025 से विचाराधीन था। उन्हें 23 फरवरी 2026 को न्यायालय में उपस्थित होने का अंतिम अवसर दिया गया था। यह परिवाद लोक सेवक को कर्तव्य से रोकने या आत्महत्या के प्रयास से संबंधित है। (संवाद)
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