फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिसने पाला पोसा उसी ने मार डाला

विज्ञापन
विज्ञापन
चित्रकूट/मानिकपुर। कुख्यात डाकू गौरी यादव के सफाये से जहां क्षेत्रवासियों ने राहत की सांस ली, वहीं डाकू गौरी यादव के परिजन एसटीएफ पर तरह-तरह के आरोप लगा रहे हैं। परिवार के लोगों का कहना है कि जो एसटीएफ उसे गांव से बीहड़ ले गई, उसे हर तरह की सुविधाएं दी, उसी ने मतलब निकल जाने के बाद मार डाला। मां राजरानी, पत्नी हीराकली और भतीजे जितेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि डाकू ददुआ और ठोकिया को मारने के लिए एसटीएफ और पुलिस ने ही गौरी यादव को आश्रय देकर जरायम की दुनिया में पहुंचाया था। इस बुरे काम का बुरा नतीजा तो सबको मालूम ही था। बताया कि अपराध की दुनिया से वापस लौटने के लिए परिजनों ने कई बार कहा, लेकिन गौरी लौटकर नहीं आया। परिजनों के इस आरोप को एसटीएफ के एडीजी अमिताभ यश ने बेबुनियाद बताया है।
विज्ञापन

कैलहा का मुठभेड़ से कनेक्शन
मानिकपुर। मुठभेड़ को लेकर परिजनों के साथ ही ग्रामीणों में कई तरह की चर्चाएं हैं। दावा किया गया कि पूरा मामला कैलहा गांव से शुरू हुआ। इसके बाद रातोरात पहुंची एसटीएफ टीम गांव से तीन किमी दूर ले जाकर डाकू गौरी का एनकाउंटर कर दिया। डाकू गौरी के भतीजे जितेंद्र यादव के मुताबिक शुक्रवार की शाम कैलहा गांव के एक ट्यूबवेल पर योजना बनाकर शराब व गोश्त की पार्टी की गई थी। इसमें मौजूद कुछ लोगों ने खाने में नशे की सामग्री मिला दी। जब डाकू गौरी नशे में धुत हो गया तो उसे वहीं मार दिया गया। इसके बाद पूर्व योजना के अनुसार एसटीएफ को सूचना दी गई। रातोंरात एसटीएफ की टीम पहुंची और शनिवार की सुबह डाकू गौरी के मारे जाने की पुष्टि हुई। जितेंद्र यादव के इस दावे को एसटीएफ अधिकारियों ने गलत बताया है।
तीन डाक्टरों ने पैनल ने किया पोस्टमार्टम
चित्रकूट। डाकू गौरी यादव के शव का पुलिस बल और परिजनों की मौजूदगी में शनिवार की शाम पोस्टमार्टम कराया गया। तीन डाक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया। इसकी वीडियो रिकार्डिंग भी कराई गई है। संवाद
विज्ञापन

इसी स्थान पर मारा गया था भालचंद्र यादव
चित्रकूट। डाकू गौरी गैंग के 25 हजार के इनामी भालचंद्र यादव को भी एसटीएफ और पुलिस टीम ने 31 मार्च को माड़ो बांध के पास मुठभेड़ में मार गिराया था। इसको लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रहीं हैं। इसी घटनास्थल के महज 50 मीटर दूर ही अब डाकू सरगना भी ढेर कर दिया गया है। पहले की मुठभेड़ में दावा किया गया था कि सरगना मौजूद था, लेकिन वह भाग निकला था। लगभग सात माह बाद सरगना भी इसी बांध के पास मारा गया। संवाद
डकैतों की पनाहगार था पाठा
चित्रकूट। पाठा के बीहड़ जंगल डकैतों के लिए काफी मुफीद थे। करीब छह दशक से डकैतों ने इसे अपनी पनाहगार बना रखी थी। एसटीएफ ने डाकू गौरी को मारकर आखिरी अध्याय का अंत कर दिया। डाकू ददुआ उर्फ शिवकुमार, ठोकिया, बलखड़िया, छोटा पटेल, गुड्डा पटेल, बबुली कोल आदि के मारे जाने के बाद डाकू गौरी यादव ही नामी बचा था। वह राजनीति पर भी अच्छी पकड़ रखता था। गौरी यादव अपनी हनक के दम पर 2016 में अपनी मां राजरानी को प्रधान बनाया था। वह प्रधानी से लेकर लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में भी दखल रखता था। वह पाठा में एकछत्र राज कर रहा था। डाकू गौरी यादव एके 47 जैसे अत्याधुनिक असलहे से लैस था। उसका मुखबिर तंत्र भी काफी मजबूत था। इसके चलते वह चित्रकूट पुलिस को कई बार चकमा दे चुका था, लेकिन यूपी एसटीएफ को शुक्रवार और शनिवार को बड़ी सफलता मिल गयी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें