चित्रकूट। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धर्मनगरी को फ्री जोन बनाने की घोषणा की है पर इसके फ्री जोन के लिए अभी इंतजार करना पड़ेगा। इसके अनुपालन की प्रक्रिया बेहद लंबी है। सरकारी आंकड़ों में इसे कैसे फ्री जोन बनाने के लिए दोनों प्रदेश के मंत्री और अधिकारी बैठक कर दायरा बनाएंगे। फिलहाल साधु संतों व क्षेत्रवासियों का कहना है कि आगे चाहे जो योजनाएं बने लेकिन अभी फ्री जोन की घोषणा के बाद यूपी से एमपी व एमपी से यूपी आने वाले लोगों से पार्किंग शुल्क, तहबाजारी व यात्रीकर न वसूला जाए। किसी वाहन चालक को आरटीओ विभाग से लाइसेंस लेने की जरूरत न पड़े। पूरे निर्धारित क्षेत्र में कोई भी वाहन कहीं भी आसानी से बेरोकटोक के आ जा सके।
कई संतों व समाज सेवियों ने कहा है कि इसके पहले एमपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी चित्रकूट को फ्री जोन करने की घोषणा की थी लेकिन कई समस्याओं का आज तक निदान नहीं किया गया। बैरियर तो हट गए लेकिन पार्किंग व तहबाजारी की वसूली अभी भी हो रही है।
गौरतलब है कि धर्मनगरी के कई तीर्थ स्थान यूपी व एमपी में पड़ते है। जिसमें प्रमुख रूप से रामघाट का भी आधा हिस्सा पड़ता है। कई स्थानों पर बैरियर लगाकर वसूली भी की जाती रही है। एक माह पहले एमपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान धर्मनगरी आए थे। उन्होंने भी धर्मनगरी के एमपी क्षेत्र को फ्री जोन घोषित कर दिया था। जिससे क्षेत्र में लगे दर्जनों बैरियर हटा दिए गए हैं लेकिन हर तीर्थ में नगर पंचायत की रसीद काटी जाती है।
अधिकारियों का कथन
चित्रकूट। धर्मनगरी के यूपी एमपी क्षेत्र में तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए नगर पंचायत काम करतीं हैं। नगर पंचायत चित्रकूट मप्र के सीओ ओमपाल सिंह भदौरिया ने बताया कि बैरियर तो हटा दिए गए हैं लेकिन मेला में तहबाजारी की वसूली की जाती है। दीपावली मेले में तो पांच दिन में नगर पंचायत को सात लाख की आमदनी होती है। वैसे हर अमावस्या व पर्व पर तहबाजारी ली जाती है। इसके अलावा पार्किंग के लिए श्रीपाल त्रिपाठी के नाम 32 लाख का ठेका है। शासन के नियमानुसार ही काम हो रहा है। फ्री जोन में अभी इसे बंद करने के आदेश नहीं है। इधर चित्रकूटधाम कर्वी नगर पालिका के ईओ नरेंद्र मोहन मिश्रा ने बताया कि मेला क्षेत्र में पालिका कोई वसूली नहीं करती। पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल से ही बैरियर खत्म कर तहबाजारी भी बंद है। सिर्फ रैन बसेरा में आने वाले वाहनों से पार्किंग ली जाती है। मेले का पूरा खर्च सरकार व पालिका उठाती है। फ्री जोन का दायरा व नियम लागू होने के बाद जो कंडीशन बनेगी उस हिसाब से काम किया जाएगा।
प्रति वाहन काटी जाती है 50 रुपये की रसीद
खोही। बडे़ हनुमान के संत योगेंद्र दास ने बताया कि एमपी क्षेत्र में बैरियर तो हटा लिए गए लेकिन अभी भी प्रति वाहन पर 50 रुपये की रसीद काटी जाती है। समाजसेवी हरीशंकर सिंह पटेल ने बताया कि यूपी क्षेत्र से चलने वाले टेंपो एमपी क्षेत्र में नहीं घुस पाते। जिससे श्रद्धालुओं को पैदल चलकर एमपी क्षेत्र जाना पड़ता है। बैरियर हटाने के साथ ही वाहन के आने जाने पर भी छूट दी जाए। संत आनंद दास व संतोषी अखाड़ा के महंत रामजी दास, समाजसेवी डॉ. रमेश पटेल, व्यापारी शानू गुप्ता व योगेश जैन आदि का कहना है कि फ्री जोन होना ज्यादा आसान नहीं है। यूपी-एपी क्षेत्र के धार्मिक स्थानों में जाने के लिए सरकारी बस चलाई जाए जो आसानी से एक- दूसरे की सीमा में घुस जाए।