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गांव वाले नहीं जानते दरोगा ने की थी दूसरी शादी

Sat, 23 May 2015 11:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चित्रकूट।
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भइया, ज्ञानेंद्र सुबह आवत रहा और शाम होत चला जात रहा। न कौनौ से बोलत बतात रहा  और न मतलब राखत रहा। यह कहना है प्रतापगढ़ में तैनात दरोगा ज्ञानेंद्र सिंह के पैतृक गांव छिवलहा के लोगों का। गांव के होनहार लड़के के ऐसे कृत्य के ग्रामीण हतप्रभ हैं। अमर उजाला टीम शनिवार को दरोगा ज्ञानेंद्र के गांव पहुंची तो उसके घर पर ताला पड़ा मिला। गांव वालों ने बताया कि बेटे की करतूत की खबर फैलते ही बेचारी मां कहीं चली गई।
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ज्ञात हो कि 18 मई को चित्रकूट और कौशांबी क्षेत्र में पड़ते राजापुर में यमुना नदी पुल के पास महेवाघाट पर फेंकी गई महिला की सिरकटी निर्वस्त्र लाश छिवलहा गांव के निवासी दरोगा ज्ञानेंद्र सिंह की पत्नी का निकला। ज्ञानेंद्र 18 मई की सुबह ईशा को कानपुर स्थित उसके घर से लेकर कुष्मांडा देवी के दर्शन कराने निकला था। उसके बाद से दोनों का कुछ पता नहीं चल रहा था। 22 मई को महेवाघाट पर मिली महिला की शिनाख्त हुई तो घटना की जानकारी मिली। तब से ज्ञानेंद्र फरार चल रहा है। अमर उजाला पहले दिन से इस खबर पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है।

मऊ कसबे से लगभग दस किमी दूर है ज्ञानेंद्र का गांव छिवलहा। इस घटना के बाद शनिवार को अमर उजाला टीम ज्ञानेंद्र के गांव पहुंची। ग्रामीणों ने बताया कि यहां किसी को नहीं मालूम कि उसकी दूसरी शादी भी हुई है। शायद मां को भी यह बात न पता हो। इतना जरूर पता है कि पहली पत्नी से अनबन के बाद वह अलग रह रही है। वैसे ज्ञानेंद्र देखने में बहुत शांत स्वभाव का है। ऐसी वारदात को किन परिस्थितियों में उसने अंजाम दिया कह नहीं सकते। गांववालों ने बताया कि ज्ञानेंद्र के पिता कुबेर सिंह लगभग पंद्रह साल पहले घर छोड़कर चले गए।
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कुछ ने बताया कि इनका मानसिक संतुलन ठीक नहीं था। गए तो फिर लौटे नहीं। वह होमगार्ड थे। ज्ञानेंद्र का छोटा भाई विनोद इलाहाबाद में खुद ट्यूशन कर खर्चा निकालता है और पढ़ाई कर रहा है। घर में सिर्फ मां राजकुमारी है। वह अपने छह बीघा खेत को बंटाई में देकर जैसे तैसे घर चला रही है। गांव के रज्जू, जयप्रकाश आदि ने बताया कि ज्ञानेंद्र गांव आता था तो किसी से कोई मतलब नहीं रखता।

उसकी पहली पत्नी नीलम और दो बच्चे भी बहुत कम यहां आए। नीलम बछरन गांव की है और उसके मायके वाले फिलहाल सतना जिले के एक गांव में रह रहे हैं। प्रधान गुलाब चंद्र ने बताया कि ज्ञानेंद्र के एक चाचा जनार्दन सिंह कानपुर में रहते हैं। दूसरे घनश्याम सिंह गांव में ही रहते हैं। उनसे फोन पर बात हुई तो बताया कि ज्ञानेंद्र से कभी दुआ सलाम तक नहीं होती थी। वह अपने से मतलब रखने वाला लड़का है। ज्ञानेंद्र ने अपने घर में कभी मदद नहीं की। शादी के समय जरूर उसने घर बनवा दिया था।

एएसपी करेंगे दरोगा ज्ञानेंद्र की करतूतों की जांच
निलंबित दरोगा ज्ञानेंद्र सिंह की करतूतों की जांच अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी करेंगे। उसने विभाग में भी दूसरी शादी का कोई ब्योरा नहीं दिया है। शनिवार को पट्टी सर्किल में पुलिसकर्मी उसकी तलाश करते रहे, लेकिन वह हाथ नहीं लगा।
दरोगा ज्ञानेंद्र सिंह ने कानपुर में तैनाती के दौरान काकादेव थाना क्षेत्र की ईशा सचान से झूठ बोलकर दूसरी शादी की थी। हकीकत सामने आने पर ईशा व ज्ञानेंद्र के बीच विवाद होने लगा। गत दिनों ईशा के घर पंचायत के बाद उसे लेकर ज्ञानेंद्र मां कूष्मांडा का दर्शन कराने की बात कहते हुए निकल गया। शुक्रवार को चित्रकूट व कौशांबी क्षेत्र में ईशा की सिर कटी लाश मिली थी। इसके बाद ज्ञानेंद्र के खिलाफ दर्ज मुकदमे को कौशांबी पुलिस ने कानपुर स्थानांतरित कर दिया। एसपी बलिकरन सिंह यादव ने ज्ञानेंद्र सिंह के अभिलेखों की जांच कराई। शनिवार को एसपी ने निलंबित दरोगा ज्ञानेंद्र सिंह के दो शादी करने की बात को लेकर विभागीय जांच शुरू करा दी। इस मामले की जांच एएसपी पूर्वी करेंगे।
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