ओरा गांव में बागें नदी के पास खनन के विरोध में किसानों का धरना 15 दिन से जारी है। उन्हें खेती की चिंता सता रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा निर्धारित मानक को दरकिनार कर खनन जारी है। इससे नदी की दिशा बदल जाएगी और पंप कैनाल के बंद होने की आशंका है। इससे उन्हें सिंचाई में परेशानी होगी।
ओरा गांव में बागें नदी के पास करीब पांच दर्जन ग्रामीण रोजाना अनशन पर बैठते हैं। उन्हाेंने बताया कि बागें नदी के पास पट्टाधारक प्रकाश द्विवेदी निवासी खुरहंड (बांदा) का 32.91 एकड़ का बालू खनन का पट्टा है। उसमें बालू खनन से ओरा पंप कैनाल को नुकसान होगा। किसानों के विरोध को देखते हुए प्रशासन ने गत 19 मई को नापजोख कराई थी और पंप कैनाल से चारों ओर सौ मीटर की दूरी पर खनन न करने के आदेश जारी किए थे।
साथ ही आगाह किया था कि निर्धारित गहराई से ज्यादा खुदाई न की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि इसके बावजूद खनन जारी है। उन्हाेंने कहा कि इसके चलते उन्हें सिंचाई संकट का सामना करना पड़ेगा। इसी समस्या के विरोध में उन्होंने अनशन शुरू किया है। अनशन में बैठने वालों के नाम बाकायदा रजिस्टर में दर्ज होते हैं और ड्यूटी लगाई जाती है। अभिलेष मिश्रा, रामलखन, रजौली, उमेश, फौजी, गपरछा, बलराम आदि ग्रामीणों को पंप कैनाल बंद होने का डर सता रहा है। सांसद भैरो प्रसाद मिश्र भी पंप कैनाल में पानी की समस्या को लेकर चिंता जाहिर कर चुके हैं।
वहीं पट्टाधारक प्रकाश द्विवेदी ने बताया कि उनका पट्टा पूरी तरह वैध है और वह निर्धारित सीमा में ही खनन कर रहे हैं। प्रशासन भी नापजोख करा चुका है। वह किसी तरह का विवाद नहीं चाहते। कुछ लोग ग्रामीणों को भड़का रहे हैं। उन्होंने बताया कि एडीएम द्वारा एसपी को पत्र भी भेजा जा चुका है। इसमें कहा गया है कि बालू/मौंरग खनन पट्टाधारक प्रकाश चंद्र द्विवेदी निवासी छिबांव अतर्रा बांदा के पक्ष में राजापुर के ओरा में गाटा संख्या 4ख, 5ख, 06 और 75 रकबा 32.91 एकड़ पर बाधित अवधि 31 दिसंबर 2014 से 22 सितंबर 2016 तक स्वीकृत है।
सहायक अभियंता लघु डाल नहर खंड द्वितीय बांदा, खनन अधिकारी चित्रकूट की आख्या के अनुसार जिलाधिकारी के आदेश पर उन्हें नदी तट से तीनों तरफ सौ मीटर की सीमा तक और वाटर लेवल से अधिक गहराई तक खनन कार्य न करने की शर्त पर इसकी अनुमति दी गई है।
पंप कैनाल पर एक दर्जन गांव आश्रित
ओरा पंप कैनाल की नींव 1972 में रखी गई और 1979 से किसानों को इससे पानी मिला। अब यह आसपास के गांवों के लिए बहुत महत्वपूर्ण बन गई है। ओरा गांव के लवकुश गौतम ने बताया कि इससे ओरा, पिलखनी, केवटपुरवा, बसहर, रायपुर, भानपुर, चौरा, अगरहुंड़ा, दरसेड़ा, बसंतपुर आदि गांवों के किसानों की लगभग दस हजार हेक्टेअर भूमि की सिंचाई होती है। अगर यह पंप कैनाल बंद हो गई तो बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।
पुलिस स्तर पर कुछ नहीं कर सकते
एएसपी आरडी चौरसिया ने बताया कि यह पूरी तरह से प्रशासन और खनन विभाग का मामला है। पुलिस का रोल तो सिर्फ कानून व्यवस्था तक सीमित है। जिलाधिकारी ने अपने अधीनस्थों से जो स्थलीय आख्या मांगी होगी, उसी आधार पर कार्रवाई उनको करनी है।ं पुलिस स्तर पर कुछ नहीं किया जा सकता। वहीं पहाड़ी थाने के प्रभारी एसओ शेषमणि त्रिपाठी ने बताया कि एसओ छुट्टी पर गए हैं। इस संबंध में क्या किया गया है, वही बता पाएंगे।