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वेदों के अस्त्वि के बिना भारतीय संस्कृति अधूरी

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चित्रकूट। मानिकपुर के ऐंचवारा स्थित श्री स्वामी भगवान भाष्करानंद देव जू महाराज संस्कृत वेद पाठशाला में तीन दिवसीय वैदिक सम्मेलन के दूसरे दिन शुक्रवार को प्रथम सत्र में संस्कृत के विद्वानों ने वेद पुराणों के महत्व और उसके पठन पाठन के तरीकों के बारे में विधिवत जानकारी दी। प्रथम सत्र का शुभारंभ लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (दिल्ली) के प्रो. गोपाल प्रसाद शर्मा ने दीप प्रज्जवलित कर किया। उन्होंने कहा कि वेद भारतीय संस्कृति के आधार हैं। वेदों के अस्तित्व के बिना भारतीय संस्कृति अधूरी है।
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उन्होंने कहा कि वेद व ग्रंथों के अस्तित्व को बनाएं रखने के लिए उनका अध्ययन आवश्यक है। इस जानकारी को हर व्यक्ति के पास पहुंचाया जाए। साथ ही यह भी बताया कि वेद पढ़ने के लिए व्याकरण जानना जरूरी है। वेद पढ़ते समय एक भी गलती नहीं होनी चाहिए। इसलिए वेद पढ़ते समय सावधानी बरतनी चाहिए।
आदर्श विद्यालय उज्जैन के आचार्य सौरभ शास्त्री ने कहा कि वेदों का अध्ययन अनुशासन में रहकर करें। ऐसा न करने से वेद के तथ्य को समझना मुश्किल होगा। वेदों को पढ़ते समय उपमाएं भी समझनी होंगी। अथर्वेद पैपलाद शाखा उड़ीसा के संपादक कुंज बिहारी उपाध्याय ने कहा कि वेद पढ़ाने के लिए सभी जिलों में अध्ययन केंद्र होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एेंचवारा के भगवान भाष्करानंद देव जू महाराज संस्कृत वेद पाठशाला को विश्वविद्यालय बनाया जाए।
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कार्यक्रम मेें संस्कृत वेद पाठशाला ऐंचवारा के प्रबंधक संत ओम बाबा, सदगुरू चरण सेवा समिति ऐचवारा के निदेशक डॉ हरिकांत मिश्र, प्रणव पांडेय, धीरज कुमार पाठक, मलय पंडा, वैकुंठ गौतम, महेंद्र नाथ, गंगा प्रसाद मिश्र, अंकुर पांडेय व अभिषेक कुमार मिश्र आदि ने भी व्याख्यान दिया।
उधर, वैदिक सम्मेलन के दूसरे दिन शुक्रवार को संस्कृत के छात्रों ने वेद मंत्रोंच्चार के साथ शंख ध्वनि की। इससे समूचा माहौल धार्मिक बना रहा। वहीं, कार्यक्रम में पर्यावरण संतुलन का भी ध्यान रखा गया। मिट्टी के बने बर्तनों में मंचासीन अतिथियों को जलपान दिया गया।
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