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चित्रकूट में नियमों की अनदेखी कर बांटी यूरिया

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फोटो-1- शहर के गल्ला मंडी स्थित इफ्को गोदाम से खाद ले जाते किसान - फोटो : CHITRAKUTT
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चित्रकूट। यूरिया खाद के आवंटन में शासन के नियमों को ताक पर रख खाद का वितरण करने के मामले में जांच की जा रही है। आरोप है कि 20 समितियोें ने बिना आधार के ही यूरिया खाद का वितरण कर दिया। और कई किसानों को अधिक खाद मिल गई। कई पात्र भटक रहे हैं। इस संबंध में प्रथम दृष्टया माना जा रहा है कि पॉस मशीन में नेटवर्किंग की समस्या सहित अन्य समस्या होने के कारण यह समस्या आयी है। खाद वितरण में गड़बड़ी की शिकायत पर अबतक एक समिति के प्रभारी को निलंबित किया जा चुका है। इसके अलावा दो अधिकारियों को नोटिस भी दी जा चुकी है।
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जिले में चल रही खाद की कमी के बाद जिलाधिकारी शेषमणि पांडेय ने टीम सहित समितियों में खाद की कमी को लेकर छापे मारे थे। जिसमें इस बात का खुलासा हुआ था कि समितियों से एक-एक किसान को यूरिया की खाद अधिक दे दी गई है। जिस पर जिलाधिकारी ने कार्रवाई करते हुए जिसमें शहर के पीसीएफ केंद्र के मनीराम को निलंबित कर दिया था। वही कोआपरेटिव के सहायक निबंधक नरेंद्र यादव व पीसीएफ जिला प्रबंधक निर्मल कुमार कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। वही जिला कृषि अधिकारी बसंत दुबे ने बताया कि कुछ किसान को अधिक खाद उपलब्ध कराने की मामले की जांच की जा रही है। समितियों के कर्मचारियों सहित किसानों से बात की गई है।
आदेश के बाद भी कई समितियों के नहीं खुले ताले
चित्रकूट। जिले में खाद की किल्लत को देखते हुए सहकारी समितियों को लॉकडॉउन होने के बाद खोलने के आदेश दिए गए थे। शनिवार व रविवार को कई समितियों के ताला तक नहीं खुले। जबकि शहर के गल्लामंडी स्थित इफ को समिति में एक ट्रक यूरिया खाद पहुंचने पर पहले पाने के लिए मारामारी रही। यहां तक की व्यवस्था के लिए पुलिस कर्मी तैनात रहे।
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इस साल जिले में 2019.285 टन उपलब्ध कराई गई है। जिसमें 1202.265 टन यूरिया खाद किसानों को उपलब्ध कराई गई। जबकि शेष 817.020 टन खाद रबी की फसल के लिए स्टाक में रखी गई थी। किल्लत को देखते हुए इसमें भी जिलाधिकारी के आदेश पर खाद का आवंटन किया गया। जिससे खाद का वितरण किया गया। इसके बाद लॉकडाउन के समय में भी समितिया खोलकर आवंटित करने के लिए निर्देश दिए गए। जिला कृषि अधिकारी यूरिया की खाद जिले में दो स्थानों से ऑवला शहर व फूलपुर शहर से आती है। फूलपुर शहर से तो ट्रक के माध्यम से खाद आ रही है। लेकिन ऑवला शहर से खाद नहीं आ पा रही है। उन्होंने बताया कि इस बार कृषि का क्षेत्रफल बढ़ जाने से भी खाद की अधिक मांग है।
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