राजापुर (चित्रकूट)। तुलसी तीर्थ में चार दिवसीय तुलसी साहित्य समागम के दूसरे दिन मंगलवार को कई संतों ने एकमत से कहा कि संत तुलसीदास ने रामचरित मानस के माध्यम से सनातन संस्कृति की रक्षा की। प्रभु श्रीराम की भक्ति को घर-घर तक पहुंचाने का कार्य किया।
तुलसी रिसॉर्ट में चल रहे कार्यक्रम में काशी के संत शिवाकांत मिश्रा ने कहा कि जिस समय विदेशी आक्रमणकारी सनानत संस्कृति खत्म करने पर जुटे हुए थे। सनातन धर्म का प्रचार करने वालों को प्रताड़ित किया जाता था। उसी समय राजापुर में जन्मे तुलसीदास ने राम चरित मानस लिख कर प्रभु श्रीराम की भक्ति का पाठ पढ़ाने का कार्य किया। मौन रखकर भगवान की भक्ति का आनंद उठाना चाहिए।
संत मोरारी बापू ने चित्रकूट तीर्थ स्थान की महिमा का वर्णन किया। कहा कि तुलसीदास को चित्रकूट के रामघाट में श्रीराम के दर्शन हुए थे। इससे वह धन्य हो गए थे। चित्रकूट में कण-कण में श्रीराम है। उन्होंने तुलसी तीर्थ को भी महान बताया। कहा कि इस धरती पर तुलसी दास का जन्म हुआ है।
काशी के संत आशीष मिश्रा ने कहा कि सुंदरकांड में तीन स्थानों पर विशेष रामकथा का वर्णन किया गया है। पहले राम भक्त हनुमान ने विभीषण को रामकथा सुनाई, फिर माता सीता को तीसरी जगह रावण के दरबार में हनुमान ने काम, क्रोध लोभी रावण को रामकथा सुनाई। राम कथा से ज्ञान व विवेक का संचार होता है। सीहोर मध्यप्रदेश से आयीं कथावाचक जय श्री शर्मा ने कहा कि रामचरित मानस में त्याग का बहुत बड़ा महत्व है। माता कैकेयी ने पुत्र मोह व पति मोह को त्याग कर अपने पति दशरथ से श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास मांगा।
कार्यक्रम में कथाकार कृपाशंकर, रामप्यारे शरण, रामेश्वर हरिवाणी अहमदाबाद, अनूप शास्त्री चित्रकूट, भागवत पाठक सीधी, रामचंद्राचार्य बक्सर, नंदीशरण अयोध्या, मैथिलीशरण ऋषिकेश, मुरलीदास ओंकारेश्वर, जयंती शर्मा सिहोर आदि संत मौजूद रहे। इसके पूर्व सभी संत महंतों का जिले के जिला पंचायत अध्यक्ष अशोक जाटव,विधायक अविनाश चंद्र द्विवेदी, नगर पंचायत अध्यक्ष संजीव मिश्रा, डीसीबी अध्यक्ष पंकज अग्रवाल, नगर पालिका अध्यक्ष नरेंद्र गुप्ता, पूर्व सांसद आरके पटेल, पूर्व विधायक आनंद शुक्ला, मनोज द्विवेदी, कमलेश मिश्रा, मधुरेंद्र प्रताप सिंह, सुभाष अग्रवाल, शिवपूजन गुप्ता, अनिल देवरहा आदि ने फूल माला से स्वागत कर आशीर्वाद लिया।