चित्रकूट। पेंशनरों को झांसे में लेकर करोड़ों रुपये के गबन के मामले में स्पेशल टास्क फोर्स (एसआईटी) कार्रवाई कर रही है। जांच में सामने आया है कि पकड़े गए कई बिचौलिए आपस में रिश्तेदार हैं और उन्होंने एक गिरोह बनाकर इस वित्तीय अनियमितता को अंजाम दिया।
एसआईटी ने मानिकपुर थाना क्षेत्र के हनुवा निवासी देव कुमार त्रिपाठी उर्फ बोग्गन त्रिपाठी को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में देव कुमार त्रिपाठी के भाई रितेश त्रिपाठी उर्फ मुन्नू त्रिपाठी के खिलाफ भी अहम सबूत मिले हैं, जिसकी तलाश में एसआईटी कई जगहों पर छापेमारी कर रही है। देव कुमार त्रिपाठी, पहले से जेल जा चुके बिचौलिए बरहट निवासी दीपक पांडेय का साला है। दीपक पांडेय कोषागार में तैनात रहे एक पटल सहायक का करीबी बताया जा रहा है।देव कुमार ने पूछताछ में बताया कि वह अपने भाई रितेश और बहनोई दीपक पांडेय के साथ मिलकर पेंशनरों के खातों में घोटाला की रकम डलवाकर भुगतान कराता था। रितेश त्रिपाठी अभी भी फरार है और उसकी तलाश जारी है।
एसआईटी प्रभारी अरविंद कुमार वर्मा ने बताया कि घोटाले में गिरफ्तार पेंशनर अवधेश नारायण पांडेय, बिचौलिया देव कुमार त्रिपाठी के सगे मौसा हैं। उनके खाते में भी लाखों रुपये का भुगतान हुआ है। इसी प्रकार पेंशनर कमला देवी, दयाराम और अन्य कई लोगों के खातों में भी घोटाला की रकम डालकर निकाली गई है।यह खुलासा करता है कि किस तरह से बिचौलियों ने अपने रिश्तेदारों और पेंशनरों के साथ मिलकर इस बड़े वित्तीय घोटाले को अंजाम दिया। एसआईटी ने जेल में बंद 35 आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट भी दाखिल कर दी है।