चित्रकूट। कोषागार में 43.13 करोड़ रुपये के बहुचर्चित घोटाले के मामले में मंगलवार को सुनवाई के बाद न्यायालय ने जेल में बंद पेंशनर रामरतन की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। रामरतन करीब साढ़े तीन माह से इस मामले में जेल में निरुद्ध हैं। उन पर कुल 11 किस्तों में 55 लाख 45 हजार 951 रुपये की अनियमित भुगतान का आरोप है।
न्यायालय में पेश की गई जमानत अर्जी में पेंशनर रामरतन ने खुद को निर्दोष बताते हुए किसी भी धनराशि को हड़पने या जालसाजी की घटना में अपनी संलिप्तता को निराधार बताया था। हालांकि, न्यायालय को सुनवाई के दौरान पेंशनर द्वारा स्वयं रुपये निकालने के साक्ष्य मिले हैं। इन साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने जमानत अर्जी को निरस्त कर दी।
दो अन्य की अर्जी पर आज होगी सुनवाई
इस मामले में बिचौलिए दीपक पांडेय के साले देव कुमार त्रिपाठी उर्फ बोग्गन त्रिपाठी को भी पेंशनरों से मिलीभगत कर खातों से रुपये निकलवाने के आरोप में जेल भेजा गया है। देव कुमार के परिजन अब उसके लिए जमानत की अर्जी लेकर बुधवार को सत्र न्यायाधीश न्यायालय में सुनवाई के लिए पहुंचे हैं। इससे पहले भी तीन दिन पूर्व इस मामले में सुनवाई टल गई थी।
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क्या है पूरा मामला
कोषागार में अक्तूबर माह में 43.13 करोड़ रुपये के इस बड़े घोटाले का खुलासा हुआ था। इस मामले में वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह ने 93 पेंशनरों और चार कर्मचारियों के खिलाफ सदर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। मामले की जांच एसआईटी को सौंपी गई थी। जांच के दौरान एक कर्मचारी की मौत हो चुकी है, जबकि दो कर्मचारी विकास सिंह सचान और अशोक वर्मा को एसआईटी गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।