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कोषागार घोटाला : अफसरों से बोले आरोपी, गलती तो हुई पर अब रास्ता बताओ

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चित्रकूट। कोषागार में हुए 43.11 करोड़ के घोटाले की जांच गुरुवार को बारिश के कारण धीमी रही। तीसरे दिन जांच समिति के सामने छह पेंशनर व उनके सहयोगी ही पहुंचे। अन्य ने फोन कर बारिश के कारण न आने की बात कही। जांच समिति के सवालों पर पेंशनर व उनके सहयोगी कई बार असहज दिखे। हाथ जोड़कर बोले- गलती तो हुई है, पर अब बताओ रास्ता क्या है। आज किसी को भी जेल नहीं भेजा गया। इससे पहले दो दिन में 30 आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं।
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जिले के कोषागार विभाग में पेंशनरों के खाते में अनियमित व अवैध रूप से लाखों करोड़ों रुपये पहुंचने और सरकारी धन के दुरुपयोग का खुलासा हुआ है। विभाग की ऑडिट जांच में 43.11 करोड़ के गलत भुगतान का मामला सामने आया। इसमें कोषागार विभाग के चार अधिकारियों समेत कुल 97 लोगों पर रिपोर्ट दर्ज हुई है। एक आरोपी संदीप का निधन हो चुका है। 30 आरोपी जेल जा चुके हैं। विभाग ने एक करोड़ 58 लाख से ज्यादा की रिकवरी भी की है।
बृहस्पतिवार को कोतवाली परिसर व कोषागार विभाग में जांच अधिकारी तो पहुंंचे लेकिन कई आरोपी नहीं आए। उनके पास आरोपियों के फोन आए कि बारिश की वजह से वह नहीं आ पा रहे हैं। सिर्फ छह पेंशनर व उनके सहयोगी पहुंचे। जांच समिति के अजीत पांडेय, उपेंद्र प्रताप सिंह व एमपी त्रिपाठी के सवालों के सामने पेंशनर कई बार बेबस दिखे। जब पूछा गया कि उनके खाते में पेंशन से ज्यादा रकम आने की बात सामने आती थी तो किसी से शिकायत क्यों नहीं की तो हर बार पेंशनर हाथ जोड़कर कहते रहे कि गलती तो हुई है अब आगे रास्ता क्या है। जांच समिति ने सभी से सरकारी धन जल्द जमा करने की शर्त पर रियायत दी है। निर्देश दिए कि जिला छोड़कर बाहर न जाएं।
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एसआईटी के प्रभारी सीओ सिटी अरविंद वर्मा ने बताया कि अभी तक 30 को जेल भेजा गया है। बृहस्पतिवार को किसी को जेल नहीं भेजा गया। जांच जारी है अन्य को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया है।
कोषागार घोटाले की हर जांच में कोषागार विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर ही सबसे ज्यादा सवाल उठ रहे हैं। जानकार यहां तक कह रहे हैं कि ट्रेजरी अधिकारी ही सबसे ज्यादा दोषी हैं। जब बिना डिजिटल हस्ताक्षर के एक रुपये की निकासी नहीं हो सकती l फिर यह कैसे सम्भव है कि कर्मचारियों ने करोड़ों के धन का गबन कर लिया और अधिकारियों को इसकी खबर तक नहीं लगी।
बुंदेली सेना के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह ने यहां तक कहा कि जांच कराकर दोषी ट्रेजरी अधिकारियों पर भी एफआईआर दर्ज कराई जानी चाहिए। ट्रेजरी में तो सहायक कोषाधिकारी तक को दोषी करार दिया गया। यहां एटीओ के बाद किसी भी भुगतान की अंतिम जवाबदेही टीओ अर्थात ट्रेजरी आफीसर की होती है। ट्रेजरी आफीसर के ही भुगतान में अंतिम डिजिटल हस्ताक्षर होते हैं। वर्ष 2018 से लेकर अब तक के जो भी ट्रेजरी अधिकारी हैं उनकी भूमिका ट्रेजरी घोटाले में सबसे बड़ी है। ऐसे अधिकारियों पर भी एफआईआर दर्ज कराकर कार्रवाई की जानी चाहिए।
कोषागार घोटाले के आरोपियों से सरकारी धन जमा कराने में तेजी आई है। बृहस्पतिवार को कुल एक करोड़ 18 लाख 52 हजार 816 रुपये जमा हुए हैं। इसके बाद रिकवरी की रकम दो करोड़ 76 लाख 78 हजार 653 रुपये हो गई है।
रिकवरी में भुल्लू राम से 1,99,689 रुपये, केसनिया पति बरमदीन से छह लाख रुपये, अरविंद कुमार शुक्ला से दो लाख, गिरजा प्रसाद से 13,11,516 रुपये जमा कराए गए हैं। रुक्मणी देवी पत्नी मोहन लाल से 32,47,082 रुपये, रानी देवी पत्नी स्वर्गीय अवधेश कुमार से 4,42,296 रुपये, मोहनिया देवी पत्नी घनश्याम से 15 लाख, काशी नाथ त्रिपाठी से 1,86,610 रुपये, बलवंत से 3,30,000 रुपये जमा कराए गए। अवधेश नारायण से 12 लाख 480 रुपये, सरमनिया से 6,76,668 रुपये, बलवंत से 44 हजार रुपये, शकुंतला से 17000 रुपये, राधे श्याम पांडेय से 4,24,475 रुपये, गंगोत्री से 91,000 रुपये, मोहनिया से 7,11,000 रुपये, रामरतन से 33000 रुपये व रानी से 51000 रुपये की रिकवरी हुई है।
कोषागार घोटाले के बाद अब विभाग ने पेंशन प्राप्त कर रहे समस्त सम्मानित पेंशनरों / पारिवारिक पेंशनरों से जीवित प्रमाण पत्र विभाग को देने का निर्देश दिया है। वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह ने बताया कि समस्त पेंशनर्स / पारिवारिक पेंशनर्स अपना जीवित प्रमाण-पत्र, एक नवीनतम कलर फोटो, बैंक पासबुक की मूल प्रति जिसमें फोटो चस्पा हो, शाखा प्रबन्धक द्वारा हस्ताक्षरित हो एवं आधार की छायाप्रति व पीपीओ/ पेंशनर परिचय पत्र के साथ एक माह के भीतर कोषागार में उपस्थित हों अथवा आनलाइन जीवन प्रमाण-पत्र प्रेषित करें, जिससे उनका सत्यापन कर उनके खातों में पेंशन/पारिवारिक पेंशन भेजी जा सके। संवाद
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