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Chitrakoot News: गुंता बांध प्रोजेक्ट निरस्त होने से पर्यटन की उम्मीदों पर प्रहार

Fri, 31 Oct 2025 11:42 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
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चित्रकूट। पर्यटन की संभावनाओं को गति देने जा रहे चित्रकूट के गुंता बांध प्रोजेक्ट पर ग्रहण लग गया है। गुंता बांध से लगे इलाके की खूबसूरती को चार चांद लगाने की योजना थी। इसके लिए शासन ने करोड़ों रुपये भी अवमुक्त किए। मगर अमलीजामा पहनाने में सिंचाई विभाग ने रोड़ा डाल दिया। एनओसी न देने पर इस प्रोजेक्ट को ही रद्द कर दिया। इससे पर्यटन संभावनाओं को तो झटका लगा है। साथ ही पर्यटन उद्योग में गहरी नाराजगी और निराशा है।
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बदलते दौर में नई पीढ़ी में फैशन वाली जिंदगी जीने का शौक बढ़ा है। ज्यादातर वक्त लोग अपनों के संग फाइव स्टार होटलों में बिता रहे हैं, लेकिन अब इससे उनका मन उचटने लगा है। सुकून की तलाश में प्राकृतिक छांव में कुछ पल बिताने को लोग सैर-सपाटे पर भी आ रहे हैं। चित्रकूट भी प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। यहां का इलाका विंध्य पर्वतमाला और घने जंगलों से घिरा है।
यहां पर भगवान श्रीराम, सीता और लक्ष्मण ने अपने वनवास का अधिकांश समय बिताया था। यहीं पर गोस्वामी तुलसीदास को प्रभु श्रीराम के दर्शन हुए थे। चित्रकूट के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में किया गया है और यह अपने शांत, मनोरम वातावरण के लिए जाना जाता है। इसे देखते हुए पर्यटन विभाग ने वर्ष 2023-24 में सिंचाई विभाग के सहयोग से गुंता बांध ईको टूरिज्म योजना में संवारने की योजना बनाई थी।
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साथ ही फरवरी 2024 में मंजूरी देकर 2.64 करोड़ रुपये भी अवमुक्त कर दिए थे लेकिन सिंचाई विभाग ने इसमें अड़ंगा लगा दिया। एनओसी न देने पर शासन ने गुंता बांध परियोजना निरस्त कर दिया। उपसचिव संजीव कुमार श्रीवास्तव ने पर्यटन विभाग के महानिदेशक को पत्र जारी किया। इसके जरिए उन्होंने परियोजना में अवमुक्त 264 लाख की रकम को ब्याज से सहित राजकोष में जमा करने के आदेश दिए।
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ये थी गुंता बांध परियोजना
रैपुरा गांव के पास राष्ट्रीय राजमार्ग से दो किमी अंदर गुंता बांध बना है। इस बांध दायरा करीब आठ किमी में है। वर्ष 1977 में इस बांध को बनाया गया था। वहीं पर बगल में पार्क भी बना है। इस पार्क में हाथी, घोड़ा, तोप, बैठने के लिए बेंच, बच्चों के मनोरंजन के भी संसाधन थे। देखभाल की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग के कंधों पर थी लेकिन रखरखाव में इसकी सूरत बदरंग हो गई।
गुंता बांध पर पर्यटन की संभावनाएं तलाशने पर काम किया था। बाद में इसे ईको टूरिज्म योजना में विकसित करने का खाका खींचा था। कार्ययोजना के मुताबिक बांध बनाने के साथ ही वहां पर बोटिंग और पार्क का सुंदरीकरण कार्य कराए जाने थे। ताकि यहां पर पर्यटक आकर बोटिंग का भी लुत्फ उठा सकेंगे। गुंता बांध पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने से आसपास के गांव रामपुर, बेलहारी, रैपुरा, अगरहुड़ा, बेलहा आदि के लोगों को रोजगार भी मिलता।
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प्रोजेक्ट रद्द होने से मायूसी
बुंदेली सेना के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह का कहना है कि गुंता बांध का विकास होने से जिले के अलावा दूसरे जिले व प्रदेश के भी पर्यटकों का आवागमन होता, इससे स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलता। शासन से बजट मिलने के बाद भी अगर रुपये वापस हो रहे हैं तो यह विभाग की नाकामी है। इस मसले पर जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह से बातचीत कर गुंता बांध को विकसित कराया जाएगा। रैपुरा के प्रधान जगदीश उर्फ गुड्डा पटेल का कहना है कि गुंता बांध के पर्यटन विकास की जानकारी मिलने पर क्षेत्रवासियों को खुशी थी, लेकिन योजना निरस्त होने पर उम्मीदों पर पानी फेरने काम है।


बोले जिम्मेदार
गुंता बांध परियोजना सिंचाई विभाग के दायरे में आती है। इसे पर्यटन विभाग की ईको टूरिज्म योजना में संवारने का खाका खींचा गया था पर सिंचाई विभाग ने इसकी एनओसी नहीं दी। इसलिए पर्यटन विभाग ने खारिज कर दिया।
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-आरके रावत, क्षेत्रीय अधिकारी पर्यटन चित्रकूट।
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