मानिकपुर(चित्रकूट) के चितहरा से मझगवां रेलवे स्टेशन के आगे तक 8 किलोमीटर का रेलवे ट्रैक पर शुक्रवार की देर शाम को बाघ आ गया। इसी बीच एक मालगाडी भी उधर से गुजर रही थी अचानक ट्रेन की आवाज सुनते ही ट्रैक के पास मौजूद चौकीदार ने चिल्लाकर बाघ का ध्यान आकृष्ट किया।
चिल्लाने की आवाज सुन बाघ ने जंगल की ओर छलांग लगा दी जिससे वह बच गया और धडधड़ाते हुए ट्रेन गुजर गई। दो हफ्ते पहल शावकों संग बाघिन के रेलवे ट्रैक पर आ जाने से बाघिन को बचाने के लिए सुपरफास्ट ट्रेन रूकी थी।
जिले की सीमा से सटे जंगल मझगवंा चितहरा रेलवे स्टेशन से तीन किलोमीटर दूर घटित हुई है। दिन दहाड़ वयस्क बाघ गहिरा नर्सरी की ओर से आया और रेलवे ट्रैक पर खड़ा होकर इधर-उधर देखने लगा। दूर से मालगाड़ी डाउन ट्रैक पर आ रही थी। वहां पर उपस्थित ग्रामीण इसी दृश्य को देख रहे थे। तभी वन विभाग का चौकीदार भी आ गया।
चौकीदार चुनकावन ने जोर का हल्ला कर टाइगर को ट्रैक से दूर करने का प्रयास किया। गनीमत यह रही की चौकीदार की यह तरकीब काम आ गई और बाघ जंगल की ओर भाग गया। बाघ के हटते ही मालगाड़ी धडधड़ाते हुए ट्रैक पार गई। अगर मालगाड़ी और स्पीड से आती होती तो और बाघ को हटाया न जाता तो बड़ा हादसा हो जाता। इसके बाद आसपास के जंगल में बाघ की रेलवे ट्रैक के पास न पहुचने के लिए वनकर्मियों ने सर्चिंग अभियान भी चलाया।