चित्रकूट। प्रसव दौरान जिला अस्पताल में तीन नवजातों की मौत हो गई। प्रसूता व उनके परिजनों ने अस्पताल स्टाफ पर देरी से इलाज शुरू करने का आरोप लगाया है। सीएमएस ने कहा कि आरोप गलत हैं।
शहर से सटे कुली तलैया निवासी कमलेश सिंह ने बताया कि शुक्रवार की देर रात उसके बेटे लवलेश की पत्नी को तेज प्रसव दर्द होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रसव होने के बाद नवजात की हालत बिगड़ने लगी तो मौजूद स्टाफ से इलाज को कहा गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। लगभग चार घंटे बाद नवजात की मौत हो गई। बृहस्पतिवार को मऊ के अहिरी बालापुर निवासी राजाबाबू ने बताया कि उसकी पत्नी गुड़िया को प्रसव दर्द के बाद सीएचसी में भर्ती कराया गया। जहां से जिला अस्पताल के लिए रेफर किया गया। रात में मौजूद स्टाफ ने भर्ती तो कर लिया लेकिन प्रसव उपरांत नवजात व प्रसूता का इलाज नहीं किया। नवजात की हालत बिगड़ने पर स्टाफ को बुलाया गया लेकिन स्टाफ काफी देर बाद आया कुछ घंटे बाद ही नवजात की मौत हो गई।
इसके अलावा जमहिल निवासी राधेश्याम ने बताया कि बृहस्पतिवार की रात को उसकी पत्नी मायादेवी को प्रसव दर्द के बाद जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। प्रसव उपरांत इलाज में देरी से नवजात की मौत हो गई। इन मामले में सीएमएस डा. आरके गुप्ता ने बताया कि तीनों नवजात के इलाज में कोई देरी नहीं हुई। तीनों नवजात पूरे माह के नहीं थे। इसकी पूछताछ स्टाफ से की गई है। माया का प्रसव कई दिन पूर्व हुआ था। प्रसव उपरांत जच्चा बच्चा को परिजन घर ले गए जबकि उन्हें जाने से रोका गया था। वहीं नवजात की हालत बिगड़ी थी। गुड़िया व लवलेश की पत्नी के नवजात कम वजन व कम माह के थे।