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भोजन, पानी व दवा कराने में गड़बड़ी की आशंका, होगी जांच

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चित्रकूट। राजकीय संप्रेक्षण गृह के किशोर बंदी के मौत के मामले में परिजनों ने प्रभारी अधीक्षक पर आरोप लगाते हुए डीएम-एसपी को शिकायती पत्र सौंपा है। पुत्र के मौत के कारणों की जांच की मांग की है।
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गौरतलब है कि कसहाई रोड़ स्थित राजकीय किशोर संप्रेक्षण गृह में पेटदर्द से पीड़ित कानपुर निवासी किशोर की गुरुवार को मौत की जानकारी होने पर शुक्रवार को मर्चरी हाउस में मृतक की मां मलिका ने बताया कि पुत्र कानपुर संप्रेक्षण गृह में बंद था जिसे चित्रकूट भेजा गया था। उसे कोई बीमारी नहीं थी। एक माह पूर्व ही पुत्र से बात हुई थी। इसके बाद चार दिन से यदि उसकी तबियत खराब है तो उन्हें जानकारी नहीं दी गई। गुरुवार को उसकी मौत होने के बाद फोन पर जानकारी दी गई। कारण पूछने पर पेट की बीमारी से मौत होना बताया गया। मृतक की मां ने कहा कि मामला संदिग्ध है। उन्होंने प्रभारी अधीक्षक पर आरोप लगाते हुए डीएम व एसपी को पत्र सौंपकर मामले की जांच कराने की मांग की।
शुक्रवार को राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य नीता साहू नेे निरीक्षण कर जानकारी ली। भोजन, पानी में गड़बड़ी की आशंका जताई है और इलाज कराने में घोर लापरवाही की बात कही है। निरीक्षण के दौरान ही तीन से अधिक किशोर बीमार मिले। जिसमें प्रतापगढ़ के किशोर समेत तीन को अस्पताल इलाज के लिए भेजा। उन्होंने अपनी रिपोर्ट शासन को भेजने की बात कही है।
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चार डाक्टरों की टीम ने किया पोस्टमार्टम
चित्रकूट। सीएमओ डा. राजेंद्र सिंह ने डा. शैलेंद्र सिंह, मनीष शुक्ला, मूलचंद्र वर्मा, अमित प्रताप सिंह की देखरेख में पोस्टमार्टम कराया है। वीडियोग्राफी भी कराई गई। मृतक की मां ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर स्पष्ट होगा। घटना के बाद से मृतक के परिवार में कोहराम मचा है। पिता की मृत्यु पांच वर्ष पूर्व हो गई थी। मां ने माना कि मृतक नशे का आदी था। पूर्व में नशीला पदार्थ रखने के आरोप में जेल जा चुका था। मृतक के चार बहन, दो भाई हैं।
एसडीएम ने डाक्टरों की लापरवाही की भेजी रिपोर्ट
चित्रकूट। राजकीय संप्रेक्षण गृह में किशोर की पेट दर्द से मौत के मामले को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। सदर एसडीएम इंदु प्रकाश ने बताया कि प्रारंभिक जांच में कई गड़बड़ी पाई गई हैं। खासकर संप्रेक्षण गृह में बाल बंदियों के साथ व्यवहार व भोजन व्यवस्था के अलावा बीमार होने पर समय से इलाज न कराने की बात सामने आई है। कानपुर के किशोर की मौत मामले में भी यही हुआ है। कई दिनों से पेटदर्द का इलाज करने में अस्पताल के डाक्टरों की भी भूमिका पर सवाल उठे हैं। कई दिनों से उसकी बीमारी पर महज औपचारिकता निभाई गई। इसकी रिपोर्ट जिलाधिकारी को दी गई है।
मां मुझे बचा लो, अब नहीं करूंगा
चित्रकूट। कानपुर के जूही झकरकटी निवासी किशोर बंदी की राजकीय संप्रेक्षण गृह चित्रकूट में मौत होने की जानकारी पर चाहकर भी मां मलिका गुरुवार को यहां नहीं पहुंच पाई। अमर उजाला से बातचीत में अपने पुत्र का जिक्र आते ही वह फूट फूटकर रो पड़ी। बताया कि एक माह पूर्व बेटे से फोन पर बात हुई थी जिस पर बेटे ने कहा था मां उसे छुड़ा लो अब वह ऐसा काम नहीं करेगा। मां ने बताया कि बेटा नशीले पदार्थ का सेवन करने लगा था जिससे वह परेशान तो रहती थी। बड़ा बेटा पहले से अलग रहता है। दो बेटी की शादी कर दी है दो की बाकी है। लोगों के बर्तन मांज कर किराए के घर में रहकर गुजारा करती है। अंतिम बार फोन पर बेटे से कहा था कि कुछ दिन रुक जा बर्तन मांजने वालों के यहां महीना पूरा होेने वाला है तो उसी रुपये से वह उसे छुड़ाने आएगी। बताया कि घटना की जानकारी पर वह तत्काल कानपुर से नहीं निकल सकी। उसके पास किराए के लिए रुपये नहीं थे। शाम को पड़ोसी से उधार लेकर वह चित्रकूट पहुंची।
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