भौंरी, मऊ, बरगढ़, शिवरामपुर व भरत कूप क्षेत्र में ग्रामीण बैंक बड़े नोट जमा करने वाले ग्रामीणों को मात्र एक हजार रुपये ही दे रहे हैं। वहीं इन इलाकों में लगे एटीएम में ताले लटकते रहे। बैंक में स्टाफ व स्थान की कमी से भी गांव वालों को जूझना पड़ा।
रमपुरिया गांव निवासी अखिलेश मिश्रा, ऐंचवारा गांव निवासी बाल गोविंद आदि ग्रामीणों ने बताया कि जब वे बिल बाउचर लेकर कैशियर के पास पहुंचते है तो उनसे कहा जाता है कि बिल बाउचर दूसरा भर लो क्योंकि एक हजार रुपये ही दिए जाएंगे। एक बार तो लाइन में नंबर मुश्किल से आता है। ऐसे में लौटाने पर दुबारा लाइन में लगने पर शाम हो जाती है। इन ग्रामीण क्षेत्र में खुले बैंक भवन में कम जगह होने से बैंक के अंदर लाइन में लगे वालों को सांस लेने में दिक्कतें हुईं। वहीं बिजली गुल होने पर इनर्वटर से काम चलाना पड़ रहा है। मऊ, बरगढ़, शिवरामपुर में शुक्रवार को जनरेटर चलाकर काम हुआ।
गांव चरगांव निवासी ममता द्विवेदी, सरैंया की रमनिया देवी ने बताया कि नोट बदलो अभियान में पुरुषों के साथ महिलाए भी एक ही कांउटर से रुपये बदलवाने को मजबूर हैं। इस दौरान उन्हें धक्कामुक्की का शिकार होना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों के बैंकों में न तो अतिरिक्त काउंटर खेाले गए और न ही कर्मचारी बढ़ाए गए हैं।
आज से सभी एटीएम खुलने थे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पहाड़ी, राजापुर, मानिकपुर क्षेत्र में ज्यादातर एटीएम में ताला बंदी रही। मुख्यालय के दो-चार एटीएम खुले पर वे भी आधा-एक घंटे में बंद हो गए। किसी का सर्वर खराब हो गया तो किसी में रुपया खत्म हो गया। इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक पीके पात्रा ने बताया कि एटीएम की व्यवस्था दुरुस्त न होने से इन्हें चालू नहीं करा सके।
मुसलिमपुरवा गांव के श्रवण कुमार ने बताया कि बड़ी उम्मीद के साथ ग्राहक सुबह एटीएम से दो हजार व पांच सौ के नए नोट लेने को पहुंचे लेकिन नए नोट नहीं निकले तो मायूस होकर लौट आए। एलडीएम अभिनंदन कुमार ने बताया कि एटीएम में अभी तक नए नोट को सेट नहीं किया जा सका है।
500 व 1000 के नोट बंद होने का प्रभाव धार्मिक गतिविधियों पर भी पड़ा है। मंदिरों में बड़े नोट दानपात्रों में न डालने के लिए पुजारी व मौजूद संत तीर्थयात्रियों से आग्रह कर रहे हैं। इसके बावजूद दान पेटियों से बड़े नोट निकल रहे हैं, जिसे लेकर साधू संतों के चेले बैंक में उन्हें जमा करने को लाइन लगाए हैं।
मंठ व मंदिर पर भी नोट बदलने के आदेश का असर है। घरेलू खर्च के लिए फुटकर नोट बचाने को श्रद्धालु दानपात्र में स्क्किे ज्यादा डाल रहे हैं। वहीं कुछ मंदिरों में पुजारी मौजूद रहकर श्रद्धालुओं को पांच व एक हजार रुपये के नोट न डालने को कह रहे हैं। रामायणी कुटी के मंहत राम हृदय दास ने बताया कि मंदिर के दानपात्र में कुछ श्रद्धालु मना करने के बाद भी बड़े नोट डाल रहे हैं। उन्हें छोटे नोट डालने के लिए प्रेरित किया है। तय किया है कि अब दानपत्र को नियत समय पर खोला जाएगा। जो बड़े नोट निकलेंगे उनको पहले बैंक में जमा करेंगे फिर नए नोट निकालकर उसका प्रयोग मंदिर रखरखाव के लिए करेंगे।
कार्तिक पूर्णिमा पर देव दिवाली के दौरान धर्मनगरी में हजारों तीर्थयात्री परिवार के साथ एक सप्ताह तक प्रवास करते हैं। खर्च के भुगतान के लिए एटीएम या बडे नोट उपयोग करतेे हैं। अचानक बडे़े नोटों का चलन बंद होने से ऐसे तीथयात्रियों के सामने रहने से लेकर भोजन तक की समस्या आ गई है। विनोद लॉज के मालिक अरुण गुप्ता ने बताया कि तीन दिनों से आधे कमरे भी बुक नहीं हुए। जो तीर्थयात्री रुके थे वे छोड़कर चले गए क्योंकि उनके पास फुटकर नोट नहीं थे। भोजन की बिक्री पहले 30 हजार की प्रतिदिन होती थी। अब सात हजार बिक्र्री हुई। श्रीजी के मालिक स्वप्निल अग्रवाल व रचित अग्रवाल ने बताया कि होटल कारोबार पर ग्रहण लग गया है। तीर्थयात्रियों को बैंक जाने पर वहां भी नोट बदलने के लिए लंबी लाइन लगानी पड़ती है जिससे वे परेशान होकर उन्होंने अपना बोरिया बिस्तर बांध लिया है।